पूर्व राष्ट्रपति को मार्शल लॉ मामले में 5 साल की सजा
16..jan..एक ऐतिहासिक फैसले में देश की एक विशेष अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति को मार्शल लॉ लागू करने के मामले में दोषी ठहराते हुए पांच साल की जेल की सजा सुनाई है। यह पहली बार है जब किसी पूर्व राष्ट्रपति को सत्ता में रहते हुए लिए गए ऐसे फैसले के लिए आपराधिक दंड दिया गया है। अदालत के इस फैसले को लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पूर्व राष्ट्रपति ने अपने कार्यकाल के दौरान संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी करते हुए देश में मार्शल लॉ लागू किया था। इस दौरान नागरिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया, मीडिया पर सख्त पाबंदियां लगाई गईं और कई राजनीतिक नेताओं को हिरासत में लिया गया। अभियोजन ने दलील दी कि यह कदम न तो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य था और न ही इसे संसद या संवैधानिक संस्थाओं की मंजूरी प्राप्त थी।
वहीं, बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि उस समय देश गंभीर राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा संकट से गुजर रहा था। पूर्व राष्ट्रपति ने राष्ट्रहित में यह फैसला लिया था और उनका उद्देश्य व्यवस्था बहाल करना था। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि संविधान से ऊपर कोई भी नहीं है, चाहे वह देश का सर्वोच्च पद ही क्यों न संभाल रहा हो।
फैसले के बाद अदालत परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई। पूर्व राष्ट्रपति को तुरंत हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया। उनके वकीलों ने संकेत दिए हैं कि वे उच्च न्यायालय में इस फैसले को चुनौती देंगे।
इस फैसले पर देशभर में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोकतंत्र समर्थकों और मानवाधिकार संगठनों ने इसे कानून के राज की जीत बताया है, जबकि पूर्व राष्ट्रपति के समर्थकों ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में सत्ता के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए एक मजबूत मिसाल बनेगा।

