मशीनें हार मान गईं, लेकिन डॉक्टर सुलेखा चौधरी नहीं: आगरा से इंसानियत की मिसाल
26.दिसंबर..आगरा, उत्तर प्रदेश।सरकारी अस्पतालों की बदहाल व्यवस्था के बीच इंसानियत, साहस और कर्तव्य की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया है। आगरा के एक सरकारी अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई अचानक फेल हो गई। उस वक्त वार्ड में एक नवजात शिशु जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था। मशीनें जवाब दे चुकी थीं, लेकिन ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर सुलेखा चौधरी ने हार नहीं मानी।
स्थिति बेहद नाजुक थी। नवजात को तुरंत ऑक्सीजन की जरूरत थी, लेकिन अस्पताल की व्यवस्था ने साथ नहीं दिया। ऐसे संकट के क्षण में डॉक्टर सुलेखा चौधरी ने वह किया, जो सिर्फ एक संवेदनशील इंसान ही कर सकता है। उन्होंने करीब सात मिनट तक अपने मुंह से ऑक्सीजन देकर बच्चे की सांसें चलाए रखीं। उनकी तत्परता और साहस के कारण नवजात की जान बच सकी।
डॉक्टर सुलेखा का यह कदम केवल चिकित्सा कौशल का उदाहरण नहीं है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और कर्तव्यनिष्ठा की पराकाष्ठा है। जब अक्सर सिस्टम की नाकामी पर सवाल उठते हैं, तब यह घटना बताती है कि कुछ लोग आज भी अपने पेशे को सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि सेवा मानते हैं।
इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकारी अस्पताल में ऑक्सीजन जैसी बुनियादी सुविधा का फेल होना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। हालांकि, इस अंधेरे में डॉक्टर सुलेखा चौधरी एक उजली रोशनी बनकर सामने आई हैं।
आज डॉक्टर सुलेखा सिर्फ एक डॉक्टर नहीं रहीं, बल्कि वे साहस, करुणा और कर्तव्य की जीवंत मिसाल बन गई हैं। उनका यह कार्य हमेशा याद रखा जाएगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।

