Punjab

मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य का संगम स्नान से इनकार

18..JAN..प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान ज्योतिषपीठ बद्रीनाथ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर संगम में स्नान करने से इनकार कर दिया। उन्होंने यह निर्णय प्रशासनिक अव्यवस्था और अपने शिष्यों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार के विरोध में लिया। शंकराचार्य के इस फैसले से संत समाज और श्रद्धालुओं के बीच चर्चा तेज हो गई है।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि मौनी अमावस्या स्नान से पूर्व सरकार के गृह सचिव के निर्देश पर उनके शिष्यों के साथ धक्कामुक्की की गई। उन्होंने कहा कि संतों और शिष्यों के साथ इस प्रकार का व्यवहार न केवल निंदनीय है, बल्कि यह सनातन परंपराओं का अपमान भी है। शंकराचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक संत समाज को सम्मान और सुरक्षित वातावरण नहीं मिलेगा, तब तक ऐसे आयोजनों में सहभागिता पर पुनर्विचार किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि माघ मेला केवल एक प्रशासनिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में प्रशासन को संतों के मान-सम्मान और धार्मिक मर्यादाओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि मेले में वीआईपी व्यवस्था के नाम पर साधु-संतों की उपेक्षा की जा रही है, जो स्वीकार्य नहीं है।

हालांकि शंकराचार्य ने संगम स्नान से इनकार किया, लेकिन उन्होंने मौनी अमावस्या के महत्व को रेखांकित करते हुए देशवासियों से आत्मशुद्धि, संयम और मौन का पालन करने का आह्वान किया। उनके इस कदम को कुछ संतों ने समर्थन दिया, जबकि कुछ ने इसे प्रशासन और संत समाज के बीच संवाद की कमी का परिणाम बताया।

प्रशासन की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। माघ मेले जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में इस तरह का विवाद भविष्य की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *