लोहड़ी का उत्सव और सिनेमा में इसकी झलक
13 जनवरी..आज मंगलवार, 13 जनवरी को लोहड़ी का पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। लोहड़ी मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा का प्रसिद्ध लोकपर्व है, लेकिन इसकी लोकप्रियता के कारण अब यह त्योहार देश के लगभग हर हिस्से में मनाया जाने लगा है। यह पर्व शरद ऋतु के अंत और गर्मी के आगमन का प्रतीक माना जाता है। लोहड़ी के दिन लोग अलाव जलाते हैं, उसके चारों ओर परिक्रमा करते हैं, मूंगफली, रेवड़ी, तिल और गुड़ अर्पित करते हैं और लोकगीतों पर भांगड़ा व गिद्धा करके खुशियां मनाते हैं।
लोहड़ी में गीतों का विशेष महत्व होता है। पारंपरिक लोकगीतों के माध्यम से लोग प्रकृति, फसल और जीवन की खुशियों का उत्सव मनाते हैं। खासतौर पर नई फसल और नवविवाहित जोड़ों या नवजात शिशु के लिए लोहड़ी मनाने की परंपरा भी प्रचलित है। यही सांस्कृतिक रंग और जीवंतता इसे एक खास त्योहार बनाती है।
लोहड़ी की यह रंगीन झलक भारतीय सिनेमा में भी कई बार देखने को मिली है। हिंदी और पंजाबी फिल्मों में लोहड़ी के दृश्य कहानी को सांस्कृतिक गहराई देने का काम करते हैं। फिल्म वीर-ज़ारा में लोहड़ी का दृश्य पंजाब की परंपराओं और भावनाओं को खूबसूरती से दर्शाता है। वहीं दिल बोले हड़िप्पा और यमला पगला दीवाना जैसी फिल्मों में लोहड़ी के गीत और नृत्य दर्शकों को त्योहार की मस्ती से जोड़ते हैं।
पंजाबी सिनेमा में तो लोहड़ी लगभग हर पारिवारिक फिल्म का अहम हिस्सा रही है। इन फिल्मों के माध्यम से देश-विदेश में बैठे लोग भी इस पर्व की परंपराओं से परिचित हुए हैं। कुल मिलाकर, लोहड़ी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता, उल्लास और नई शुरुआत का प्रतीक है, जिसे सिनेमा ने और भी लोकप्रिय बना दिया है।



