शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र, अंतरिक्ष में भारत का गर्व
नई दिल्ली — 26 जनवरी 2026 को 77वें गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत के प्रतिष्ठित अशोक चक्र से ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को सम्मानित किया। उन्हें देश का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार उनके अद्भुत साहस और ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए प्रदान किया गया है।
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर कदम रखने वाले पहले भारतीय के रूप में अंतरिक्ष इतिहास में नया मुकाम बनाया। वे 25 जून 2025 को Axiom Mission‑4 (Ax‑4) मिशन में शामिल होकर लगभग 18 दिनों तक ISS पर रहे, जिसमें उन्होंने वैज्ञानिक प्रयोग और अंतरिक्ष अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस मिशन ने न सिर्फ भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को एक नई पहचान दी, बल्कि देश के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिये भी प्रेरणा का स्रोत बना। शुक्ला ISS पहुंचने वाले पहले भारतीय हैं और केवल दूसरे भारतीय नागरिक हैं जो अंतरिक्ष की सीमा पार कर चुके हैं — पहले भारतीय थे राकेश शर्मा, जिन्होंने 1984 में सोवियत मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रा की थी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्ला की बहादुरी और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान का प्रतीक है, बल्कि भारत की उन्नति और आत्मविश्वास का भी प्रतीक है। इस अवसर पर कुल 70 सेनाओं और वीर नागरिकों को भिन्न‑भिन्न वीरता पुरस्कारों से नवाजा गया।
शुभांशु शुक्ला भारतीय वायुसेना के अनुभवी पायलट भी हैं, जिनके पास 2,000 से अधिक उड़ान घंटे हैं और उन्होंने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण विमान उड़ाए हैं। उनका यह कारनामेदार संघर्ष और अंतरिक्ष पहुंचने की उपलब्धि अब पूरे देश के लिये गर्व का विषय बन चुका है।
इस ऐतिहासिक सम्मान से भारत के अंतरिक्ष प्रयासों को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिली है, और भविष्य में गगनयान जैसे मानव अंतरिक्ष मिशनों की सफलता के लिये मार्ग और भी स्पष्ट हुआ है।

