सद्गुरु जी से आत्मीय भेंट, प्रकृति-संरक्षण का संकल्प
27..dec.आज तमिलनाडु की पुण्य भूमि होसुर में आध्यात्मिक गुरु एवं ईशा फाउंडेशन के संस्थापक पूज्य सद्गुरु जग्गी वासुदेव (SadhguruJV) जी से आत्मीय भेंट का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह भेंट न केवल स्मरणीय रही, बल्कि विचारों और भावनाओं से परिपूर्ण एक अत्यंत प्रेरणादायी अनुभव भी सिद्ध हुई। इस दौरान हुई चर्चा बेहद सार्थक और दूरदर्शी रही, जिसने जीवन, प्रकृति और विकास के बीच संतुलन की आवश्यकता को गहराई से रेखांकित किया।
भेंट के समय वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत था। सद्गुरु जी के विचारों में गहन स्पष्टता और व्यापक दृष्टिकोण झलकता है। उन्होंने प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर विकास के मार्ग को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका मानना है कि यदि मानव अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर धरती और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।

सद्गुरु जी का विजन केवल आध्यात्मिक उन्नति तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सामाजिक, पर्यावरणीय और मानवीय चेतना के समग्र विकास पर केंद्रित है। ईशा फाउंडेशन के माध्यम से चलाए जा रहे विभिन्न अभियान, जैसे मिट्टी बचाओ आंदोलन और जल संरक्षण पहल, इस बात का प्रमाण हैं कि आध्यात्मिकता को व्यवहारिक जीवन से कैसे जोड़ा जा सकता है।
इस भेंट के दौरान हृदय अद्भुत ऊर्जा और सकारात्मकता से भर उठा। सद्गुरु जी का सरल व्यक्तित्व, गहन ज्ञान और प्रकृति के प्रति उनका अटूट समर्पण सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। यह मुलाकात निस्संदेह हमें यह संकल्प लेने के लिए प्रेरित करती है कि हम व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर ऐसे प्रयास करें, जिससे धरती को जीवनदायिनी, सुरक्षित और समृद्ध बनाया जा सके।
यह आत्मीय संवाद लंबे समय तक स्मृति में रहने वाला है और प्रकृति-संरक्षण की दिशा में सतत प्रयास करने की प्रेरणा देता रहेगा।


