सपा सांसद को रोके जाने पर सियासी घमासान
10…jan..मेरठ में ‘हत्या-अपहरण’ के एक गंभीर मामले में पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ सांसद को पुलिस द्वारा रोके जाने की घटना ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। इस कार्रवाई को विपक्ष ने न सिर्फ अलोकतांत्रिक बताया है, बल्कि इसे भाजपा सरकार की संवेदनहीनता और तानाशाही रवैये का उदाहरण भी कहा है।
सपा नेताओं का आरोप है कि जब एक जनप्रतिनिधि पीड़ित परिवार के दुःख में सहभागी बनने जा रहा था, तब उसे जबरन रोकना यह दर्शाता है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। विपक्ष का कहना है कि भाजपा शासन में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और सरकार उन्हें बचाने में जुटी हुई है। जिन मामलों में त्वरित कार्रवाई और कठोर कदम उठाए जाने चाहिए, वहां प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
इस पूरे घटनाक्रम में ‘बुलडोज़र नीति’ पर भी सवाल उठे हैं। विपक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि जहां आम लोगों और गरीबों पर बुलडोज़र चलता है, वहीं गंभीर अपराधों के आरोपियों के मामले में सरकार की सख्ती गायब हो जाती है। इससे यह संदेश जाता है कि कानून सबके लिए समान नहीं है।
सपा नेताओं ने भावुक शब्दों में कहा कि एक माँ का दर्द और घर की बहन-बेटियों का मान-सम्मान किसी भी राजनीतिक एजेंडे से बड़ा होता है। ऐसे मामलों में राजनीति से ऊपर उठकर संवेदनशीलता दिखाने की जरूरत होती है। उन्होंने मांग की कि दोषियों के खिलाफ तत्काल और निष्पक्ष कार्रवाई की जाए तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए, ताकि आम जनता का कानून पर भरोसा बना रहे।

