साइना नेहवाल ने लिया संन्यास, भारतीय बैडमिंटन का एक युग समाप्त
20..jan.. भारतीय बैडमिंटन की दिग्गज खिलाड़ी साइना नेहवाल ने 35 साल की उम्र में पेशेवर खेल से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। घुटने की गंभीर चोट और लंबे समय से चली आ रही आर्थराइटिस की समस्या के कारण उन्होंने यह कठिन फैसला लिया। साइना का संन्यास भारतीय खेल जगत के लिए भावुक क्षण है, क्योंकि उन्होंने अपने खेल से देश को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई।
करीब 20 साल के अपने शानदार करियर में साइना नेहवाल ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं। वह ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी बनीं। इसके अलावा उन्होंने विश्व चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में भी भारत के लिए कई पदक जीते। एक समय वह विश्व रैंकिंग में नंबर एक स्थान तक पहुंचीं, जो भारतीय बैडमिंटन के लिए मील का पत्थर माना जाता है।
साइना ने न केवल अपने खेल से बल्कि अपने जज्बे और संघर्ष से भी लाखों युवाओं को प्रेरित किया। सीमित संसाधनों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करना उनके समर्पण और मेहनत को दर्शाता है। चोटों से जूझते हुए भी उन्होंने लंबे समय तक वापसी की कोशिश की, लेकिन अब शरीर ने साथ देना बंद कर दिया।
उनके संन्यास के बाद भारतीय बैडमिंटन में नेतृत्व की जिम्मेदारी पीवी सिंधु जैसी अनुभवी खिलाड़ियों के कंधों पर होगी। सिंधु पहले ही ओलंपिक और विश्व स्तर पर अपनी क्षमता साबित कर चुकी हैं और आने वाले समय में वह नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगी।
साइना नेहवाल का करियर भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन भारतीय खेल इतिहास में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उनका नाम उन खिलाड़ियों में शामिल रहेगा जिन्होंने भारतीय बैडमिंटन की दिशा और दशा दोनों बदल दी।

