सिद्धू की शायरी से राहुल पर तंज
24…jan..नवजोत सिंह सिद्धू एक बार फिर अपनी शायरी और बेबाक अंदाज़ को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उनके निशाने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी रहे। राजनीतिक मंच हो या सार्वजनिक कार्यक्रम, सिद्धू अक्सर शायरी के ज़रिये अपनी बात कहते हैं और इसी अंदाज़ में उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कस दिया।.हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान सिद्धू ने शेरो-शायरी के माध्यम से नेतृत्व, निर्णय क्षमता और राजनीतिक दिशा को लेकर इशारों-इशारों में सवाल उठाए। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि “सियासत में इरादों की मजबूती ज़रूरी होती है, सिर्फ़ नाम और विरासत से मंज़िल नहीं मिलती।” उनके इस बयान को सीधे तौर पर राहुल गांधी से जोड़कर देखा जा रहा है।.सिद्धू की शायरी में व्यंग्य साफ झलकता है। उन्होंने कहा कि राजनीति में वही आगे बढ़ता है जो समय पर फैसले ले और ज़मीन से जुड़ा रहे। इस टिप्पणी को कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। गौरतलब है कि सिद्धू पहले भी पार्टी नेतृत्व को लेकर खुलकर अपनी राय रखते रहे हैं।.राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिद्धू की यह शायरी सिर्फ़ कविता नहीं, बल्कि एक सियासी संदेश है। वह अपने अंदाज़ में यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि कांग्रेस को मज़बूत नेतृत्व और स्पष्ट दिशा की ज़रूरत है। राहुल गांधी पर सीधा हमला न करते हुए भी उन्होंने अपने शब्दों से तीखा संकेत दे दिया।.वहीं कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि सिद्धू को ऐसे सार्वजनिक बयानों से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पार्टी को नुकसान पहुंचता है। उनका मानना है कि आंतरिक मतभेदों को मंच और शायरी के ज़रिये उजागर करना उचित नहीं है।.कुल मिलाकर, नवजोत सिंह सिद्धू की शायरी ने एक बार फिर सियासी माहौल गरमा दिया है। उनके तंज को चाहे आलोचना माना जाए या सलाह, इतना तय है कि उनके शब्दों ने राहुल गांधी और कांग्रेस की राजनीति पर नई बहस छेड़ दी है।

