Punjab

हिमाचल के इस मंदिर से आज्ञा लेकर ही फैसले लेते हैं भक्त, जानिए नाग मंदिर की अनोखी मान्यता

26.दिसंबर.हिमाचल प्रदेश को देवभूमि यूं ही नहीं कहा जाता। यहां हर पहाड़, नदी और मंदिर से कोई न कोई आस्था जुड़ी है। इन्हीं आस्थाओं में एक खास स्थान नाग देवता के मंदिरों का है, जहां आज भी भक्त कोई बड़ा फैसला लेने से पहले नाग देवता से आज्ञा लेते हैं। प्रदेश के कई इलाकों, खासकर मंडी, कुल्लू, कांगड़ा और चंबा में नाग मंदिरों की गहरी मान्यता है।

लोकविश्वास के अनुसार नाग देवता क्षेत्र के रक्षक माने जाते हैं। माना जाता है कि वे प्राकृतिक आपदाओं, बीमारियों और अनहोनी से गांव की रक्षा करते हैं। इसी कारण शादी-विवाह, घर निर्माण, नई खेती शुरू करने या किसी विवाद के समाधान से पहले लोग नाग मंदिर में हाजिरी लगाते हैं। कई स्थानों पर देव परंपरा के अनुसार ‘देव प्रश्न’ या ‘निशान’ के जरिए नाग देवता की इच्छा जानी जाती है।

स्थानीय मान्यता है कि यदि नाग देवता की आज्ञा के बिना कोई कार्य किया जाए तो उसमें बाधाएं आती हैं। यही वजह है कि आधुनिक दौर में भी लोग इन परंपराओं का पालन कर रहे हैं। सावन और नाग पंचमी के अवसर पर नाग मंदिरों में विशेष पूजा, मेले और भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

नाग मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र भी हैं। यहां गांव से जुड़े अहम निर्णयों पर चर्चा होती है और देवता को साक्षी मानकर फैसले लिए जाते हैं। आस्था और परंपरा का यह संगम हिमाचल की देव संस्कृति को आज भी जीवंत बनाए हुए है।

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