10 मिनट डिलीवरी पर ब्रेक
13 जनवरी..नई दिल्ली: देश में तेज़ी से बढ़ रही 10 मिनट में डिलीवरी सेवाओं पर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। उपभोक्ताओं की सुरक्षा और डिलीवरी कर्मचारियों के जीवन को खतरे से बचाने के लिए अब “10 मिनट में डिलीवरी” मॉडल को अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इस तरह की समय-सीमा डिलीवरी एजेंट्स पर अनावश्यक दबाव डालती है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, त्वरित वाणिज्य (क्विक कॉमर्स) कंपनियों को अब यथार्थवादी डिलीवरी समय तय करना होगा। नए दिशा-निर्देशों में साफ कहा गया है कि किसी भी कंपनी को ऐसी समय-सीमा का प्रचार नहीं करना चाहिए जो ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन या असुरक्षित ड्राइविंग को बढ़ावा दे। इसके साथ ही डिलीवरी पार्टनर्स के लिए न्यूनतम सुरक्षा मानक, बीमा और उचित कार्य-घंटों को अनिवार्य किया गया है।
सरकार को पिछले कुछ समय से शिकायतें मिल रही थीं कि 10 मिनट में सामान पहुंचाने की होड़ में डिलीवरी एजेंट तेज़ रफ्तार और लापरवाही से वाहन चला रहे हैं। कई शहरों में हादसों की घटनाएं सामने आईं, जिसके बाद इस मॉडल की समीक्षा शुरू की गई। उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि तेज़ डिलीवरी से सुविधा तो मिलती है, लेकिन मानव जीवन की कीमत पर नहीं।
क्विक कॉमर्स कंपनियों ने फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। कुछ कंपनियों ने इसे सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि वे पहले से ही सुरक्षित डिलीवरी पर काम कर रही हैं, जबकि कुछ को अपने बिज़नेस मॉडल में बदलाव की चुनौती दिख रही है।
सरकार ने साफ किया है कि वह नवाचार के खिलाफ नहीं है, लेकिन सुरक्षा सर्वोपरि है। आने वाले समय में डिलीवरी सेक्टर को संतुलित, सुरक्षित और टिकाऊ बनाने पर ज़ोर दिया जाएगा।

