पंजाब बिजली संकट: किसानों ने सरकार को दिया अल्टीमेटम, 5 जुलाई तक बिजली नहीं सुधरी तो 6 जुलाई से पूरे राज्य में होगा प्रदर्शन

पंजाब बिजली संकट को लेकर किसानों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन (एकता संघर्ष) ने गुरुवार को अमृतसर में पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन (पावरकॉम) के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (एसई) को ज्ञापन सौंपकर कृषि क्षेत्र में लगातार हो रही बिजली कटौती पर कड़ी नाराजगी जताई। किसान संगठन ने सरकार और बिजली विभाग को 5 जुलाई तक बिजली आपूर्ति नियमित करने का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय तक स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो 6 जुलाई को पूरे पंजाब में एसई कार्यालयों के बाहर धरना-प्रदर्शन और घेराव किया जाएगा।
पंजाब बिजली संकट से धान की फसल पर मंडराया खतरा
किसान नेता पलविंदर सिंह माहल ने कहा कि यह समस्या केवल अमृतसर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पंजाब के किसान लंबे बिजली कटों से परेशान हैं। धान की रोपाई का सीजन अपने चरम पर है और खेतों में समय पर सिंचाई नहीं होने से हजारों एकड़ फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है।
उन्होंने कहा कि किसान कर्ज लेकर खेती करता है और अपनी फसल को बच्चों की तरह संभालता है। यदि समय पर पानी नहीं मिला तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। कई क्षेत्रों में कृषि मोटरों को लगातार बिजली नहीं मिल रही, जिससे सिंचाई का पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो गया है।
पंजाब बिजली संकट पर किसानों ने सौंपा ज्ञापन
भारतीय किसान यूनियन (एकता संघर्ष) के प्रतिनिधिमंडल ने अमृतसर में पावरकॉम के एसई को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि कृषि फीडरों को नियमित और पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जाए। संगठन का कहना है कि राज्य के विभिन्न जिलों में भी किसान संगठन बिजली अधिकारियों को ज्ञापन सौंप रहे हैं और जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि लंबे समय से कृषि मोटरों और घरेलू उपभोक्ताओं दोनों को अनियमित बिजली आपूर्ति का सामना करना पड़ रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भारी परेशानी पैदा हो गई है।
5 जुलाई तक अल्टीमेटम, 6 जुलाई को पूरे पंजाब में आंदोलन
किसान संगठन ने साफ कहा है कि यदि 5 जुलाई तक बिजली आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो 6 जुलाई से पूरे पंजाब में पावरकॉम के एसई कार्यालयों के बाहर बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
संगठन ने कहा कि आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और बिजली विभाग की होगी। किसानों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग केवल नियमित और पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की है ताकि धान की फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
सरकार के दावों पर उठाए सवाल
पलविंदर सिंह माहल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार के उन दावों पर भी सवाल उठाए, जिनमें किसानों को पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने की बात कही जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीनी स्थिति इससे बिल्कुल अलग है और कई इलाकों में किसानों को दो-दो घंटे लगातार बिजली भी नहीं मिल रही।
उनका कहना है कि सरकार के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं, जबकि खेतों में किसान बिजली संकट से जूझ रहे हैं। लगातार बिजली कटौती के कारण धान की सिंचाई प्रभावित हो रही है और किसानों की लागत लगातार बढ़ रही है।
हर साल सामने आती है यही समस्या
किसान नेताओं का कहना है कि धान की रोपाई शुरू होने से पहले सरकार को बिजली व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए, लेकिन हर साल पर्याप्त तैयारी नहीं होने के कारण किसानों को संकट झेलना पड़ता है।
उन्होंने मांग की कि कृषि फीडरों के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, खराब ट्रांसफॉर्मरों को तुरंत बदला जाए और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था को मजबूत किया जाए। किसान संगठनों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पंजाब में रिकॉर्ड बिजली मांग और धान की रोपाई के दौरान बिजली कटौती को लेकर हाल के दिनों में कई जिलों में विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं।
