सिफारिश नहीं, सेंसर से मिलेगा ड्राइविंग लाइसेंस
6.. jan..अब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और तकनीक आधारित होने जा रही है। सिफारिश और मानवीय हस्तक्षेप की भूमिका लगभग खत्म कर दी जाएगी। सरकार नई टेस्ट व्यवस्था लागू करने जा रही है, जिसमें सेंसर और ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए आवेदक की ड्राइविंग क्षमता का मूल्यांकन होगा।
नई व्यवस्था के तहत ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर हाईटेक सेंसर, कैमरे और सॉफ्टवेयर लगाए जाएंगे। जैसे ही आवेदक वाहन चलाएगा, सेंसर उसकी स्पीड, ब्रेकिंग, संकेतों का पालन, लेन बदलने और संतुलन जैसी गतिविधियों को रिकॉर्ड करेंगे। यदि चालक किसी नियम का उल्लंघन करता है या वाहन पर नियंत्रण ठीक नहीं रहता, तो सिस्टम स्वतः उसे फेल घोषित कर देगा। इसमें किसी अधिकारी की व्यक्तिगत राय या सिफारिश का कोई स्थान नहीं होगा।
परिवहन विभाग का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य सड़क सुरक्षा को मजबूत करना और अयोग्य चालकों को लाइसेंस मिलने से रोकना है। अक्सर यह शिकायत सामने आती रही है कि बिना सही ड्राइविंग कौशल के भी लोग लाइसेंस हासिल कर लेते हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ती है। नई व्यवस्था से केवल वही उम्मीदवार पास हो पाएंगे, जो वास्तव में ड्राइविंग के नियमों और तकनीकों में दक्ष होंगे।
शुरुआती चरण में यह सिस्टम बड़े शहरों और प्रमुख आरटीओ कार्यालयों में लागू किया जाएगा। बाद में इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य और देश में विस्तार दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि सेंसर आधारित टेस्ट व्यवस्था न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगी, बल्कि सड़क पर जिम्मेदार और प्रशिक्षित चालकों की संख्या भी बढ़ाएगी।

