दिल्ली: 1984 सिख विरोधी दंगे मामला
22..jan..दिल्ली की एक अदालत ने 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में पूर्व सांसद सज्जन कुमार को बड़ी राहत दी है। विकासपुरी और जनकपुरी से संबंधित मामलों में अदालत ने उन्हें बरी कर दिया। कोर्ट का कहना है कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में असफल रहा।.सज्जन कुमार के वकील अनिल कुमार शर्मा ने फैसले के बाद कहा कि अदालत ने सभी तथ्यों और सबूतों पर गहनता से विचार किया। उन्होंने कहा, “कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है क्योंकि विकासपुरी और जनकपुरी मामलों में उनके खिलाफ कोई भी आरोप साबित नहीं हो सका। हमने कोर्ट को बताया था कि उन्हें जानबूझकर टारगेट किया गया था।”अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि 1984 के दंगों के दौरान सज्जन कुमार की भूमिका संदिग्ध रही और उन्होंने हिंसा को उकसाया। हालांकि, गवाहों के बयान और पेश किए गए सबूत अदालत को संतुष्ट नहीं कर सके।.अदालत ने अपने फैसले में कहा कि केवल आरोप या संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। ठोस और विश्वसनीय सबूतों का अभाव इस मामले में स्पष्ट रूप से देखा गया, जिसके चलते बरी करने का फैसला लिया गया।.फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। जहां एक ओर समर्थकों ने इसे न्याय की जीत बताया, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों ने फैसले पर सवाल उठाए और कहा कि दंगा पीड़ितों को अब भी पूर्ण न्याय नहीं मिला है।.कुछ पीड़ित परिवारों ने फैसले पर निराशा जताई है। उनका कहना है कि वे वर्षों से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन यह फैसला उनके लिए झटका है।.इस फैसले के बाद अब नजर इस बात पर है कि क्या अभियोजन पक्ष उच्च अदालत में अपील करेगा। 1984 दंगों से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया अभी भी कई स्तरों पर जारी है।

