मौत के बाद ज़िंदगी: 24 साल बाद ज़िंदा मिले पिता, परिवार की आंखें नम
30,DECEMBER JALANDHAR
JALANDHAR : यह घटना न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि इंसानियत और उम्मीद की एक ऐसी मिसाल है, जिसे सुनकर किसी की भी आंखें भर आएं। वर्ष 2001 में एक व्यक्ति अपने पिता के साथ मेले में गया था, लेकिन वह घर वापस नहीं लौटा। परिवार ने अपने स्तर पर हर संभव जगह तलाश की, रिश्तेदारों, पुलिस और जान-पहचान वालों से पूछताछ की, लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लगा। समय के साथ उम्मीदें टूटती चली गईं।इसी दौरान 2009 में उसकी मां का निधन हो गया। मां के अंतिम संस्कार के समय परिवार ने बेटे को भी मृत मानते हुए उसकी अंतिम रस्में कर दीं। उस दिन परिवार ने सिर्फ एक इंसान को नहीं, बल्कि अपनी आखिरी उम्मीद को भी विदा कर दिया। सालों तक यह दर्द उनके दिल में दबा रहा और जिंदगी किसी तरह आगे बढ़ती रही। बच्चे बड़े हो गए, लेकिन पिता की कमी हमेशा महसूस होती रही।जनवरी 2023 में किस्मत ने एक अनोखा मोड़ लिया। मलसियां बस अड्डे पर एक मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति लावारिस हालत में मिला। शाहकोट के गांव ईसेवाल स्थित बेआसिरां आश्रम के संचालक जिन्दर मान ने इंसानियत दिखाते हुए उसे आश्रम में शरण दी। वह ज्यादा बोल नहीं पाता था, लेकिन बार-बार यह इशारा करता कि वह अपने परिवार से मिलना चाहता है।आश्रम प्रबंधन ने सोशल मीडिया और कई माध्यमों से उसके परिजनों को खोजने की कोशिश की। लंबी मेहनत के बाद उसके बिहार के औरंगाबाद जिले के भोपटपुर गांव का पता चला। जब वीडियो कॉल पर परिवार ने उसे देखा, तो उनके होश उड़ गए। जिसे 24 साल पहले मृत मान लिया गया था, वह आज सामने ज़िंदा था।आखिरकार परिवार आश्रम पहुंचा और वर्षों बाद पिता से मिला। इस भावुक मिलन ने साबित कर दिया कि उम्मीद कभी मरती नहीं और इंसानियत आज भी ज़िंदा है।

