वरिंदर घुम्मण मौत मामला: हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन, नए मेडिकल बोर्ड पर स्टे
रिंदर घुम्मण मौत मामला: हाईकोर्ट सख्त, नए मेडिकल बोर्ड पर स्टे
चंडीगढ़: वरिंदर घुम्मण मौत मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। जालंधर के मशहूर बॉडी बिल्डर वरिंदर घुम्मण की कथित इलाज में लापरवाही से हुई मौत को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।http://varinder-ghumman-maut-mamla-highcourt-stay कोर्ट ने पंजाब सरकार द्वारा गठित नए मेडिकल बोर्ड पर स्टे ऑर्डर जारी करते हुए 19 मई 2026 तक जवाब तलब किया है। इस फैसले के बाद अमृतसर के फोर्टिस अस्पताल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
क्या है वरिंदर घुम्मण मौत मामला?
वरिंदर घुम्मण मौत मामला उस समय सामने आया जब एक मामूली ऑपरेशन के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि यह मौत मेडिकल लापरवाही का नतीजा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन द्वारा एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया था।
पहले सात सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि इलाज में लापरवाही हुई थी और चार डॉक्टरों—तपिश शुक्ला, अलका तिवारी, राजेंद्र कौल और अरुण कुमार चोपड़ा—को जिम्मेदार ठहराया गया। इसके आधार पर पुलिस ने मामला भी दर्ज किया।
वरिंदर घुम्मण मौत मामला में दूसरा मेडिकल बोर्ड क्यों?
इस वरिंदर घुम्मण मौत मामला में विवाद तब बढ़ा जब पंजाब सरकार ने एक नया मेडिकल बोर्ड गठित कर दिया। यह फैसला कई सवाल खड़े करता है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि यह कदम प्रभावशाली अस्पताल प्रबंधन या आरोपी पक्ष के दबाव में उठाया गया।
याचिकाकर्ता भूपिंदर सिंह ने अपनी वकील मेहर सचदेव के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दूसरे बोर्ड के गठन पर आपत्ति जताई।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट मंदीप सिंह सचदेव ने दलील दी कि पहले मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के बाद दूसरा बोर्ड बनाना न्यायिक प्रक्रिया पर संदेह पैदा करता है।
जस्टिस सुभाष मेहला की बेंच ने प्रारंभिक तौर पर माना कि जब पहले बोर्ड ने स्पष्ट रूप से लापरवाही की पुष्टि कर दी थी, तो नए बोर्ड की जरूरत क्यों पड़ी? कोर्ट ने इस पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
कानूनी पहलू और तर्क
वरिंदर घुम्मण मौत मामला में एक अहम कानूनी मुद्दा यह भी उठा कि क्या एक ही मामले में बार-बार जांच करवाई जा सकती है। याची पक्ष ने तर्क दिया कि जिस प्रकार पुलिस एक ही केस की कई बार जांच नहीं कर सकती, उसी तरह अन्य सरकारी विभागों को भी यह अधिकार नहीं होना चाहिए।
कोर्ट ने इन तर्कों को गंभीरता से लेते हुए सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया है।
आगे क्या होगा?
इस वरिंदर घुम्मण मौत मामला में अब अगली सुनवाई बेहद अहम होगी। कोर्ट के निर्देशानुसार राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करना होगा। वहीं, याची पक्ष को एडवांस कॉपी भी दी जाएगी।
माना जा रहा है कि इस केस का फैसला मेडिकल लापरवाही से जुड़े मामलों में एक बड़ा उदाहरण बन सकता है।

