मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली, विदिशा की घटना ने खोली सरकार की पोल
26.दिसंबर.मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार द्वारा स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर किए जा रहे दावों की हकीकत एक बार फिर सामने आई है। विदिशा जिले से सामने आई एक तस्वीर ने सरकारी दावों और जमीनी सच्चाई के बीच के गहरे अंतर को उजागर कर दिया है। यहां सुरेश सहरिया नामक एक गरीब व्यक्ति अपनी बीमार पत्नी को ठेले पर बैठाकर अस्पताल ले जाने को मजबूर हुआ, क्योंकि समय पर न तो एंबुलेंस उपलब्ध हुई और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब भाजपा सरकार और उसके मंत्री अखबारों, विज्ञापनों और मंचों से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर होने का दावा करते नहीं थकते। ‘सब चंगा सी’ जैसे जुमलों के सहारे सरकार अपनी उपलब्धियां गिनाती रहती है, लेकिन विदिशा की यह तस्वीर उन दावों पर करारा तमाचा है।

ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में आज भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत जर्जर है। डॉक्टरों की कमी, दवाओं का अभाव और एंबुलेंस सेवाओं की लचर व्यवस्था आम बात हो गई है। सुरेश सहरिया की मजबूरी कोई एक घटना नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली की प्रतीक बन चुकी है।
वहीं दूसरी ओर, सत्ता में बैठे मंत्री और नेता वातानुकूलित दफ्तरों और सरकारी सुविधाओं के बीच अखबारों में विकास के बड़े-बड़े दावे करते नजर आते हैं। सवाल यह है कि जब आम नागरिक को इलाज के लिए ठेले का सहारा लेना पड़े, तो सरकार की योजनाओं और प्रचार का क्या मतलब रह जाता है?
विदिशा की यह घटना सरकार से जवाब मांगती है और यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर आम जनता के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी कब और कैसे निभाई जाएगी।

