अरुण गवली की बेटियों को चुनावी मैदान में हार
16..jan..अंडरवर्ल्ड डॉन से नेता बने अरुण गवली की दोनों बेटियों गीता गवली और योगिता गवली को हाल ही में हुए चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। मुंबई की राजनीति में गवली परिवार की यह बड़ी चुनावी असफलता मानी जा रही है। कभी दगड़ी चॉल से निकलकर सत्ता तक पहुंचने वाले अरुण गवली का राजनीतिक प्रभाव इस चुनाव में कमजोर पड़ता दिखा।
गीता गवली, जो पहले भी चुनाव जीत चुकी हैं और विधायक रह चुकी हैं, इस बार मतदाताओं का भरोसा कायम रखने में सफल नहीं रहीं। उन्होंने स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों और सामाजिक सरोकारों को लेकर जोरदार प्रचार किया था, लेकिन विरोधियों की मजबूत रणनीति और बदलते राजनीतिक समीकरणों के आगे उनकी एक न चली। वहीं, योगिता गवली भी पहली बार बड़े राजनीतिक मंच पर खुद को स्थापित करने की कोशिश में थीं, लेकिन उन्हें भी मतदाताओं का अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस हार के पीछे कई कारण हैं। एक ओर जहां इलाके में नई पीढ़ी के मतदाता बदलाव की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुराने राजनीतिक चेहरों के प्रति आकर्षण कम होता नजर आया। इसके अलावा, विरोधी दलों ने जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत किया और स्थानीय मुद्दों को ज्यादा प्रभावी ढंग से उठाया।
गवली परिवार का नाम लंबे समय तक मुंबई की राजनीति और अंडरवर्ल्ड से जुड़ा रहा है। अरुण गवली खुद जेल में रहते हुए भी चुनाव जीत चुके हैं, लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदल गई हैं। इस चुनाव परिणाम ने यह संकेत दिया है कि सिर्फ पारिवारिक विरासत के सहारे राजनीति में टिके रहना अब आसान नहीं रहा।
हालांकि हार के बावजूद गीता और योगिता गवली ने लोकतंत्र में भरोसा जताते हुए जनता के फैसले का सम्मान किया है। उन्होंने कहा कि वे आगे भी सामाजिक कार्यों से जुड़ी रहेंगी और लोगों की सेवा करती रहेंगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि भविष्य में गवली परिवार की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

