श्रवण सिंह को राष्ट्रपति से मिला राष्ट्रीय बाल पुरस्कार, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मदद के लिए हुआ सम्मानित
26..दिसंबर..फिरोजपुर, पंजाब: 10 साल के श्रवण सिंह को उनके अद्भुत योगदान के लिए राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्वारा दिए गए इस पुरस्कार ने श्रवण की सेवाभावना और देशभक्ति की भावना को सराहा। श्रवण ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना की मदद करने के लिए अपने गांव में सैनिकों के लिए दूध, चाय, छाछ और बर्फ पहुँचाई थी।
श्रवण ने अवॉर्ड पाने के बाद कहा, “जब पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ, तो सैनिक हमारे गांव आए। मैंने सोचा कि मुझे उनकी सेवा करनी चाहिए। मैं उनके लिए दूध, चाय, छाछ और बर्फ ले जाता था। मुझे अवॉर्ड पाकर बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने कभी इसका सपना भी नहीं देखा था।”
श्रवण का यह योगदान गांव और देश के लिए प्रेरणास्पद माना जा रहा है। उनके इस कदम से यह साबित होता है कि देशभक्ति और सेवा का भाव उम्र या अनुभव से नहीं बाँधा जा सकता। उनके माता-पिता और शिक्षक भी गर्व महसूस कर रहे हैं और उन्होंने बताया कि श्रवण हमेशा दूसरों की मदद के लिए तत्पर रहता है।

राष्ट्रीय बाल पुरस्कार एक ऐसा सम्मान है जो बच्चों की असाधारण उपलब्धियों और समाज में उनके योगदान को मान्यता देता है। इस साल, श्रवण की चयन प्रक्रिया में उनकी निस्वार्थ सेवा भावना और देशभक्ति को विशेष महत्व दिया गया। पुरस्कार समारोह में राज्य और केंद्रीय स्तर के अधिकारी भी उपस्थित थे और उन्होंने श्रवण की प्रशंसा की।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों द्वारा समाज और देश की सेवा करना न केवल उनके व्यक्तित्व का निर्माण करता है, बल्कि उनके आस-पास के अन्य बच्चों को भी प्रेरित करता है। श्रवण का यह प्रयास बताता है कि छोटे-छोटे कदम भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
श्रवण सिंह अब पंजाब के ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं। उनका यह सफर यह संदेश देता है कि अगर लगन और सेवा भाव हो तो कोई भी उम्र बड़ी नहीं होती। उनके योगदान को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि और भी बच्चे समाज सेवा और देशभक्ति की ओर प्रेरित होंगे।

