Lebanon Me Fanse Punjabi Yuvak सुरक्षित लौटे भारत, खालसा एड के प्रयासों से 5 युवकों की हुई वतन वापसी

Lebanon Me Fanse Punjabi Yuvak आखिरकार सुरक्षित अपने वतन भारत लौट आए हैं। मानवता की सेवा के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध खालसा एड (Khalsa Aid) के लगातार प्रयासों और भारतीय अधिकारियों के सहयोग से लेबनान में फंसे पंजाब के पांच युवकों की सफल वतन वापसी संभव हो सकी। अमेरिका-ईरान तनाव के कारण लेबनान में उत्पन्न अस्थिर परिस्थितियों के बीच ये युवक लंबे समय से अपने घर लौटने का इंतजार कर रहे थे।
जालंधर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खालसा एड (भारत) के ट्रस्टी जसप्रीत सिंह दाहिया ने इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि संकट के समय में मानवता की सेवा करना ही खालसा एड का मूल उद्देश्य है और इसी भावना के तहत इन युवकों की मदद की गई।
Lebanon Me Fanse Punjabi Yuvak की वापसी कैसे हुई?
जसप्रीत सिंह दाहिया ने बताया कि खालसा एड के संस्थापक और प्रमुख सेवादार Ravi Singh लेबनान में राहत कार्यों के दौरान बेख्त स्थित गुरुद्वारा साहिब पहुंचे थे। वहीं उनकी मुलाकात पंजाब के इन युवकों से हुई।
बातचीत के दौरान युवकों ने बताया कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव, यात्रा प्रतिबंधों और अन्य प्रशासनिक समस्याओं के कारण वे अपने देश वापस नहीं लौट पा रहे थे। उनकी परेशानी को देखते हुए खालसा एड ने इस मामले को प्राथमिकता पर लिया और तत्काल कार्रवाई शुरू की।
Khalsa Aid और भारतीय दूतावास ने निभाई अहम भूमिका
Lebanon Me Fanse Punjabi Yuvak को मिला सरकारी सहयोग
रवि सिंह से जानकारी मिलने के बाद जसप्रीत सिंह दाहिया ने भारत सरकार के पूर्व विदेश सचिव और वर्तमान राज्यपाल Taranjit Singh Sandhu से संपर्क किया।
इसके बाद बेरूत स्थित भारतीय दूतावास, भारत सरकार और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया गया। आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन युवकों की सुरक्षित वापसी का मार्ग प्रशस्त हुआ।
दाहिया ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की गई, ताकि किसी भी युवक को यात्रा के दौरान कोई परेशानी न हो।
परिवारों ने जताया आभार
भारत लौटने के बाद युवकों और उनके परिवारों ने खालसा एड, रवि सिंह, जसप्रीत सिंह दाहिया, भारतीय दूतावास और तरनजीत सिंह संधू का दिल से धन्यवाद किया।
युवकों ने कहा कि वे लंबे समय से चिंता और तनाव में जी रहे थे। उन्हें लगने लगा था कि शायद वे जल्द अपने परिवारों से नहीं मिल पाएंगे। लेकिन खालसा एड की टीम ने लगातार उनका मनोबल बनाए रखा और हर कदम पर सहयोग दिया।
युवकों ने साझा किया दर्द
वतन लौटे युवकों ने बताया कि लेबनान में हालात दिन-प्रतिदिन खराब होते जा रहे थे। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण वे मानसिक रूप से काफी परेशान थे।
उन्होंने कहा कि परिवार से दूर रहना और अनिश्चित भविष्य की चिंता उन्हें लगातार परेशान कर रही थी। हालांकि खालसा एड के संपर्क में आने के बाद उनमें उम्मीद जगी और अंततः वे सुरक्षित अपने घर पहुंचने में सफल रहे।
Lebanon Me Fanse Punjabi Yuvak की सूची
सुरक्षित लौटने वाले युवकों में शामिल हैं:
- करम सिंह (पटियाला)
- दलबीर सिंह (जालंधर)
- हरजिंदर कुमार (जालंधर)
- जसप्रीत सिंह (पटियाला)
- विचित्र सिंह (होशियारपुर)
इन सभी युवकों ने अपने परिवारों से दोबारा मिलकर राहत की सांस ली।
Khalsa Aid का मानवता सेवा मिशन
दुनिया के 50 से अधिक देशों में सक्रिय
जसप्रीत सिंह दाहिया ने बताया कि खालसा एड केवल राहत सामग्री उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट में फंसे लोगों को सुरक्षा, सम्मान और नई उम्मीद देने का भी काम करती है।
आज खालसा एड दुनिया के 50 से अधिक देशों में युद्ध, प्राकृतिक आपदाओं, बाढ़, भूकंप और मानवीय संकट के समय राहत कार्य चला रही है।
संस्था ने कई देशों में विस्थापित लोगों को भोजन, चिकित्सा सहायता और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराई हैं।
पंजाब में भी चल रही हैं कई विकास परियोजनाएं
खालसा एड केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि पंजाब में भी कई सामाजिक और पुनर्वास परियोजनाओं पर काम कर रही है।
संस्था द्वारा बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए पक्के मकानों का निर्माण, किसानों को सहायता, जल संरक्षण और बाढ़ रोकथाम संबंधी स्थायी परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।
इन योजनाओं का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को दीर्घकालिक सहायता प्रदान करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
Lebanon Me Fanse Punjabi Yuvak की सुरक्षित वतन वापसी एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि मानवीय सेवा और समन्वित प्रयासों से कठिन से कठिन परिस्थितियों का समाधान निकाला जा सकता है। खालसा एड, भारतीय दूतावास और संबंधित अधिकारियों के संयुक्त प्रयासों ने पांच परिवारों को फिर से खुशियां लौटाने का काम किया है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि संकट के समय में मानवता और सेवा की भावना सबसे बड़ी ताकत होती है।

