breakingIndiaJalandharnews

फिल्म अभिनेता राजकुमार राव को 5 सिंतबर को होना पड़ेगा कोर्ट में पेश

वन्दे भारत 24  : बॉलीवुड अभिनेता राजकुमार राव के खिलाफ 2017 में फिल्म “बहन होगी तेरी” के प्रचार के दौरान एक विवादास्पद पोस्टर को लेकर दो दिन पहले कोर्ट में सुनवाई हुई। जहां कोर्ट में सुनवाई के दौरान राजकुमार ने सरेंडर कर दिया था। वहीं इस मामले को लेकर अभिनेता के एडवोकेट दर्शन सिंह दयाल का बयान सामने आया है। एडवोकेट ने कहाकि 2017 में फिल्म में शिवजी के पोस्टर को लेकर हिंदू समाज में रोष पाया गया था। इस दौरान अभिनेता राजकुमार राव, श्रुति हसन, प्रोडूयसर, डायरेक्ट और डिप्टी डायरेक्टर पर केस दर्ज हुआ था। इस मामले में धारा 295ए (धार्मिक भावनाएं भड़काने की मंशा से किया गया कृत्य), धारा 120बी (आपराधिक साजिश) और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसके चलते अभिनेता के खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किए गए थे। इस मामले में 2 व्यक्ति गिरफ्तार हो गए थे और उसके बाद उनकी बेल हो गई थी। एडवोकेट ने बताया कि अभिनेता को पहले ही अग्रिम जमानत मिली हुई थी। जिसके बाद दो दिन पहले अभिनेता ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। एडवोकेट ने बताया कि अभिनेता की गैर हाजिरी में कोर्ट में चालान पेश किया गया था। सम्मन में एड्रेस दिल्ली का होने के कारण उन्हें कोर्ट में पेश होने को लेकर जानकारी नहीं मिली थी। दरअसल, अभिनेता मुबंई में रह रहे है। वहीं श्रुति हसन को कोर्ट ने बेगुनाह पाए जाने के बाद केस ने बाहर कर दिया गया। आज कोर्ट में पन्ना लाल पहुंचे है। जिनकी कोर्ट में याचिका दायर की है। ऐसे में अन्य व्यक्तियों ने दूर से आना था और अगली तारीख को लेकर याचिका कोर्ट में लगाई गई है। याचिका में कहा गया है कि धारा 295ए के तहत कार्रवाई के लिए ‘जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण मंशा’ जरूरी होती है, जो इस मामले में कहीं से भी प्रमाणित नहीं होती। याचिका में आगे कहा गया है कि अभिनेता ने महज एक फिल्मी किरदार निभाया, जिसमें उनका पात्र एक जागरण मंडली में भगवान शिव की भूमिका निभाता है, और यह पूरी तरह एक कलात्मक प्रस्तुति है। इसके पीछे किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोई मंशा नहीं थी। राजकुमार राव की ओर से दलील दी गई कि फिल्म “बहन होगी तेरी” को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड सर्टिफिकेट मिला था, जो यह दर्शाता है कि फिल्म की सामग्री कानूनी रूप से आपत्तिजनक नहीं है। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुरक्षित है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *