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रेलवे रिजर्वेशन खिड़कियों पर खड़े एजेंटों पर सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, हुई गिरफ्तारियां

वंदे भारत– गोलबाग के रेलवे स्टेशन पर आज कल बहुत भीड़ देखने को मिल रही है। उसी के चलते गोलबाग साईड के रेलवे स्टेशन पर स्थित रिजर्वेशन खिड़की पर एजेंटों की भरमार होने की शिकायतों को लेकर आरपीएफ के क्राइम इंटेलिजेंस ब्रांच (सीआईबी) की टीम ने वीरवार की सुबह दबिश दी। इस दौरान तीन एजेंट लोगों की टिकट करवाने के लिए खड़े हुए थे, जिन्हें टीम ने हिरासत में ले लिया। एक एजेंट के पास टीम ने एक टिकट भी बरामद की है। तीनों को आरपीएफ के हवाले कर दिया गया है, जहां अगली कार्रवाई की जा रही है। बताया जा रहा है कि आरपीएफ इन तीनों के खिलाफ मामला दर्ज कर सकती है, जिसकी कागजी कार्रवाई की जा रही है। आरपीएफ कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन उन्होंने कहा कि जो कागजी कार्रवाई के बाद नियमों के मुताबिक ही कार्रवाई होगी। जानकारी के अनुसार आरपीएफ के क्राइम इंटेंजिलेंस ब्रांच की टीम सुबह सवा 11 बजे के करीब रेलवे स्टेशन गोलबाग साइड रिजर्वेशन खिड़की के पास पहुंचे। इस दौरान टीम सीधे अंदर पहुंची और वहां अपनी-अपनी कुर्सियों पर डयूटी कर रहे कर्मचारियों से पूछताछ की। इसके पश्चात टीम वहां पहुंची, जहां लोग लाइनों में लगकर अपनी टिकटे रिजर्व करवा रहे थे।

इस दौरान उन्होंने लाइनों में ही खड़े हुए तीन लोगों से पूछताछ की तो एक एजेंट के पास से एक टिकट भी बरामद हुआ। उससे जब उस टिकट के बारे पूछा गया तो वह कुछ भी जवाब नहीं दे पाया। इसके पश्चात दो अन्य एजेंटों से भी पूछताछ की गई। उनसे टिकट तो बरामद नहीं हुई, लेकिन उन्हें भी हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। इसके पश्चात टीम सीआरएस के कमरे में भी बैठी रही। आरपीएफ के अधिकारियों का कहना था कि पकड़े गए लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। रेलवे डिवीजन के रेलवे उपयोगकर्ता सलाहकार समिति के सदस्य एडवोकेट पीसी शर्मा का कहना है कि रिजर्वेशन केंद्र के आस-पास एजेंटों का ही जमावड़ा लगा रहता है। यह लोग रात के समय ही वहां पर आकर बैठ जाते हैं और सुबह तत्काल के समय अपने ग्राहकों की टिकटे रिजर्व करवाते हैं। इसके बदले लोगों से दोगुने-तिगुने पैसे लिए जाते है। इन एजेंटों की रिजर्वेशन केंद्र के अंदर तैनात कुछ स्टाफ कर्मचारियों के साथ भी मिलीभगत है। उन लोगों को भी इन एजेंटों की पहचान है, लेकिन यह लोग उन पर कार्रवाई करने की बजाय उनका साथ देते है जिनमें इनके कुछ निजी स्वार्थ होते है। उन्होंने मांग की है कि एजेंटों को पकड़ने के साथ-साथ उन काली भेड़ों को भी पकड़ा जाना चाहिए. जिनकी इन एजेंटों के साथ मिलीभगत होती है।