गुरबाणी को लेकर चहुतरफा घिरे भगवंत मान, अकाली दल ने खालसा पंथ पर बताया हमला
वंदे भारत-स्वर्ण मंदिर (श्री हरमिंदर साहिब) से प्रसारित होने वाले गुरबाणी के मुफ्त प्रसारण के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा सिख गुरुद्वारा एक्ट 1925 में संशोधन करने की घोषणा की हैं।
इस घोषणा के साथ ही विपक्षीय पार्टियों ने मुख्यमंत्री को घेरना शुरू कर दिया हैं। शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीरबादल ने तो इसे खालसा पंथ पर हमला बताया हैं तो भारतीय जनता पार्टी के नेता तरुण चुघ ने कहा कि यह संशोधन करना पंजाब सरकार के हाथ में ही नहीं हैं।
इस संबंधी ट्वीट की बखिया भी उधेड़ी जा रही
मुख्यमंत्री के इस संबंधी ट्वीट की बखिया भी उधेड़ी जा रही हैं। क्योंकि मुख्यमंत्री ने कहा हैं कि श्री हरिमंदिर साहिब, अमृतसर से पवित्र गुरबानी का प्रसारण मुफ्त में यकीनी बनाने के उद्देश्य से ऐतिहासिक फैसला लेते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार सिख गुरुद्वारा एक्ट-1925 में संशोधन करेगी। इस बारे प्रस्ताव 19 जून ( सोमवार) को होने जा रही मंत्रीमंडल की मीटिंग में पास किया जायेगा।

वहीं, सिख विद्वानों का कहना हैं कि सिख गुरुद्वारा एक्ट-1925 में संशोधन राज्य सरकार नहीं कर सकती हैं। क्योंकि यह केंद्रीय एक्ट हैं और केंद्र के एक्ट में राज्य सरकार संशोधन नहीं कर सकती। वहीं, सरकार अगर प्रस्ताव लाती हैं तो प्रस्ताव का कानूनी महत्व नहीं होता हैं।
सिख धर्मस्थलों पर सीधा हमला बताया जा रहा- बादल
वहीं, सुखबीर बादल का कहना हैं, केजरीवाल की आप सरकार के मुख्यमंत्री की पवित्र सिख गुरबाणी के बारे में घोषणा खालसा पंथ और सिख धर्मस्थलों पर सीधा सरकारी हमला है। यह घिनौना फैसला सिख समुदाय से गुरबाणी का प्रचार करने का अधिकार छीनकर गुरुधामों को अपने कब्जे में लेने की दिशा में सरकार का पहला खतरनाक और साहसिक कदम है। इस फैसले से श्री हरमंदिर साहिब पर मुगलों, अंग्रेजों और इंदिरा गांधी के दमन की याद आ गई है, लेकिन खालसा पंथ इसका मुंहतोड़ जवाब देगा। उन्होंने कहा कि इससे एक बात और साफ हो गई है। जो लोग कल तक शिरोमणि अकाली दल द्वारा सिक्ख कौम को बार-बार दी जा रही चेतावनी को केवल राजनीतिक बताते थे, सिख गुरुघरों पर सीधे कब्जा करने के लिए सरकारें जघन्य षड़यंत्र कर रही हैं।
गुरुबाणी पर किसी एक का अधिकार नहीं होना चाहिए- सुनील जाखड़
वहीं, भाजपा नेता सुनील जाखड़ का कहना हैं, मान साहिब, गुरु घर जाकर माथा टेकते हैं, मत्था लगाते नहीं हैं। उन्होंने कहा, मैं इस हक में हूं कि गुरुबाणी पर किसी एक का अधिकार नहीं होना चाहिए लेकिन जिस तरह आप अपनी सियासी रोटियां सेंकने के लिए सिखों के धार्मिक मामलों में दखल दे रहे हैं वह निंदनीय हैं। वैसे भी आप इस एक्ट में संशोधन नहीं कर सकते हैं, क्योंकि यह आपके अधिकार क्षेत्र में नहीं हैं।
