Crime

लॉरेंस गैंग के गुर्गे बना रहे खालिस्तानी आतंकियों से नया गठजोड़, अमेरिका-कनाडा के बाद अब पुर्तगाल को बनाया बेस कैंप

वंदे भारत- विदेश में रह रहे लॉरेंस बिश्नोई गैंग के गुर्गों ने नए सिरे से खालिस्तानी आतंकियों के साथ गठजोड़ बनाना शुरू कर दिया है. खुफिया एजेंसी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में हुई हत्या के बाद यह कवायद शुरू हुई हैं. निज्जर ही अब तक इन गुर्गों को हथियार सप्लाई किया करता था और अब उसकी हत्या के बाद लॉरेंस गैंग ने अर्श डल्ला, गुरपतवंत सिंह पन्नू जैसे आतंकियों से अपनी नजदीकियां बनानी शुरू कर दी हैं. यहां चौंकाने वाली बात यह है कि कनाडा, अमेरिका के बाद अब इस नए गठजोड़ का केंद्र पुर्तगाल बनकर उभरा है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद लॉरेंस गैंग नए सिरे से खालिस्तानी आतंकियों से संपर्क बना रहा है. पिछले 15 दिनों में खुफिया एजेंसियों को जो इनपुट मिले हैं, उनके मुताबिक अर्शदीप डल्ला और गुरपतवंत सिंह पन्नू से लॉरेंस गैंग के संपर्क की कई कोशिशों हुई हैं.


पुर्तगाल के नए बेस में खालिस्तानियों की मदद कर रहा ISI

खुफिया एजेंसी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक खालिस्तानी प्रोपगैंडा की हवा को पाकिस्तान हर कीमत पर उबाल पर रखना चाहता है. इसीलिए निज्जर की हत्या के बाद डल्ला और पन्नू जैसे भारत के दुश्मनों को खुले तौर पर समर्थन दे रहा है. तोरेंस गैंग को हर हाल में जिंदा रखने को लेकर आईएसआई की इससे आगे की चाल और भी खोफनाक है. खुफिया एजेंसियों को मिली अहम जानकारी ये बताती है कि पुर्तगाल इन खालिस्तानी आतंकियों का नया बेस बन रहा है. यहां से अलगाववादी खालिस्तानी प्रोपगैंडा को हवा दे रहे हैं और लॉरेंस समेत दूसरे गैंग की मदद कर रहे हैं.

खालिस्तानी आतंकियों को हथियार और पैसे मुहैया करा रही ISI
भारत के खिलाफ खालिस्तानी साजिश को अंजाम देने के लिए अब कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन की तरह पुर्तगाल में खालिस्तान आतंकियों ने अपना ऑपरेशनल बेस बना लिया है. इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में सक्रिय अपराधियों को पिछले कुछ महीनों के दौरान पुर्तगाल से हथियारों की खेप मिली है. खुफिया सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी एजेंसी ISI पुर्तगाल में रह रहे खालिस्तानी आतंकियों को ये हथियार और पैसे मुहैया करा रही है. वहां से इन हथियारों को पंजाब समेत भारत के दूसरे राज्यों में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.