हजारों लोगों की जान बचाने वाले एक हार्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टर की हार्ट अटैक से मौत
वंदे भारत 24 -: मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर गौरव गांधी (41) की अचानक मौत ने सबको हैरान कर दिया। मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट बताई गई। एमपी शाह मेडिकल कॉलेज की डीन, डॉ नंदिनी देसाई ने बताया कि गांधी ने मंगलवार शाम 4 बजे चेस्ट पेन की शिकायत की थी। कार्डियोग्राम के बाद एसिडिटी के लिए उनका इलाज किया गया। बेहतर महसूस करने पर वह घर वापस गए थे। परिवार के अनुसार, दो घंटे बाद वह बाथरूम में बेहोश होकर गिर पड़े। अस्पताल ले जाने के 45 मिनट के भीतर उन्होंने दम तोड़ दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, डॉ गांधी अपने मेडिकल करियर में 16,000 से ज्यादा हार्ट सर्जरी कर चुके थे। वह गुजरात के जामनगर स्थित G G अस्पताल में कॉन्ट्रैक्चुअल बेसिस पर काम कर रहे थे। वे एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भी प्रैक्टिस करते थे। उनके साथियों के अनुसार, वे बेहद नॉर्मल दिख रहे थे।
डॉक्टर गांधी स्वस्थ थे और उनकी मौत से मेडिकल जगत हैरान है। 41 साल के डॉक्टर गांधी की मौत इसलिए भी चौंका रही है क्योंकि हाल में ऐसी बहुत सी घटनाएं हुई हैं। आइए समझते हैं कि इन घटनाओं के पीछे हेल्थ एक्सपर्ट्स क्या वजह बताते हैं
दिल के तीन हिस्से होते हैं- आर्टरीज जो ब्लड सप्लाई करती हैं, हार्ट मसल्स जो दिल की पंपिंग को जारी रखती हैं और इलेक्ट्रिकल सर्किट जिससे दिल धड़कता है। जब ये मांसपेशियां ठीक से पंप नहीं करतीं तो खून आगे बढ़ने के बजाय कहीं फंस जाता है या फेफड़ों में रीफ्लक्स हो जाता है, जब ऐसा होता है तो मरीज की सांस फूलती है, थकान महसूस होती है, चलना या काम करना नामुमकिन हो जाता है- इसे हार्ट फेल होना कहते हैं।
जब आर्टरीज में ब्लॉकेज हो और हार्ट मसल को सप्लाई कम हो जाए तो शुरू में उसे एंजीना कहते हैं, पूरी तरह ब्लॉकेज को हार्ट अटैक कहते हैं।
जब दिल के करेंट ठीक से काम नहीं कर रहे हों तो उन्हें पैलपिलेशंस माना जाता है। अगर ये करेंट अचानक से बढ़ जाए तो दिल काफी तेजी से कांपने लगता है, मरीज गिर सकता है – उसे सडेन कार्डियक अरेस्ट कहते हैं।
हार्ट फेल होने के शुरुआती लक्षणों में सांस लेने में विजिबल परेशानी, थकान और पैरों में सूजन शामिल है। एंजीना या हार्ट अटैक की सूरत में मरीज को चेस्ट में तेज दर्द उठता है। मूवमेंट पर शॉर्टनेस और ब्रेथ और आराम पर राहत भी एंजीना का लक्षण है

नाचते-गाते, हंसते-खेलते लोगों को हार्ट अटैक जा रहा है। ऐसा भी नहीं कि बूढ़े लोग या किसी बीमारी से परेशान शिकार बने हों। बहुत सारे मामलों में बेहद कम उम्र (30 साल से कम) के लोगों ने जान गंवाई। सोशल मीडिया पर पिछले दो साल के भीतर ऐसे वीडियोज की बाढ़ सी आ गई।
अचानक मौतों पर तरह-तरह की थियरी बनने लगीं। कोई कोविड-19 वैक्सीन को वजह बताता तो कोई जीन म्यूटेशन का शिगूफा छेड़ता… इनमें से कोई थियरी वैज्ञानिकों के पैमाने पर अब तक खरी नहीं उतरी। वैसे, अचानक मौतों को लेकर मेडिकल जगत की राय भी बंटी हुई है।
कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया के अनुसार, भारत दुनिया की क्रॉनिक हार्ट डिजीज कैपिटल है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, भारतीयों का जीन ऐसा है जिसमें दिल की बीमारी होने की आशंका ज्यादा रहती है।
कई एक्सपर्ट्स कोविड-19 से जुड़े मायोकार्डिटिस और पेरिकार्डिटिस की भूमिका को शक की नजर से देखते हैं, मगर डेटा इसकी पुष्टि नहीं करता।
