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गजब! YouTube से सीख रहे थे नकली नोट छापना, लुधियाना से गिरोह का हुआ पर्दाफाश; हजारों नोटों के बंडल बरामद

गजब! YouTube से सीख रहे थे नकली नोट छापना,
लुधियाना से गिरोह का हुआ पर्दाफाश; हजारों नोटों के बंडल बरामद

वंदे भारत- थाना सराभा नगर पुलिस ने नकली नोट छापने वाले गिरोह का राजफाश किया है। गिरोह के दो सदस्यों को पकड़ लिया गया है, जबकि इनका एक साथी फरार है। इनके पास से पांच लाख 10 हजार रुपये के नकली नोट बरामद किए गए हैं। ये नकली नोट 100 व 200 रुपये के हैं। आरोपितों की पहचान सोहन सिंह उर्फ सोनी निवासी अगवाड़ लुदाई जगराओं और मनदीप सिंह उर्फ मनू निवासी रायकोट रोड अगवाड़ गुजरां जगराओं के रूप में हुई है।

अदालत में पेश कर दो दिन के रिमांड पर लिया

इनके तीसरे साथी बखतौर सिंह निवासी गांव लोहारा, मोगा की पुलिस ने तलाश शुरू कर दी है। पुलिस ने दोनों आरोपितों को अदालत में पेश कर दो दिन के रिमांड पर लिया है ओर उनसे पूछताछ की जा रही है। एडीसीपी समीर वर्मा ने बताया कि सराभा नगर पुलिस को सूचना मिली थी कि दो व्यक्ति आइ ट्वेंटी कार में सवार होकर नकली नोट का सौदा करने के लिए आए हुए हैं।

पुलिस ने इन दो को किया काबू

पुलिस ने बीआरएस नगर में दबिश देकर सड़क पर खड़ी कार में से सोहन सिंह और मनदीप सिंह को काबू किया है। पुलिस द्वारा पकड़ा गया सोहन सिंह उर्फ सोनी ड्राइवरी और प्रापर्टी की खरीद बेच का काम करता था, जबकि मनदीप सिंह उर्फ मनू फोटोग्राफर और होम्योपैथी की दवाई बेचने का काम करता था। वह रोजाना जगराओं से ट्रेन में लुधियाना आते थे। इस कारण वह दोनों अच्छे दोस्त बन गए थे। मनदीप सिंह ही मोगा निवासी लोहारा के रहने वाले बखतौर सिंह को जानता था। तीनों ने जल्दी अमीर बनने के चक्कर में उन्होंने नोट छापने की योजना बनाई थी। तीनों ने यू-ट्यूब पर वीडियो देखकर नोट छापने की ट्रेनिंग ली थी। उनकी तरफ से बखतौर सिंह की लोहारा में स्थित कोठी को इसके लिए चुना था। उसके परिवार के सदस्य विदेश में हैं और वह कोठी में अकेला रहता था। यहां पर उनकी तरफ से प्रिंटर और कागज से नोट छापने शुरू किए थे। वह पिछले करीबन एक माह से इस काम में लगे हुए थे।

पुलिस को गिरोह के बारे में पहले ही मिल गई थी सूचना

सोहन और मनदीप लुधियाना में काम करते रहे हैं तो उन्हें यहां की मार्केट का पता था। मगर उनके पास नोट खरीदने का पक्का ग्राहक नहीं था। इसलिए वह यहां की सब्जी मंडियों ओर छोटे दुकानदारों के पास यह नोट चलाते थे। यही नहीं वह बिना कटौती के ही बड़े नोटों के बदले छोटे नोट देने लगे थे। पुलिस के पास सूचना पहुंची तो उन्हें लालच देकर यहां बुलाया गया था और उन्हें काबू कर लिया गया।