चंडीगढ़ प्रशासन ने आप को कार्यालय देने से किया इनकार, अलग-अलग मुद्दों पर बनी तनातनी की स्थिति
वंदे भारत- यूटी प्रशासन ने आम आदमी पार्टी को चंडीगढ़ में पार्टी कार्यालय के लिए जमीन देने से इनकार कर दिया है। पार्टी ने पिछले माह यूटी प्रशासक और पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित से शहर में पार्टी कार्यालय के लिए उपयुक्त जमीन उपलब्ध कराने की मांग के तहत आवेदन किया था।
इसे अब प्रशासन ने खारिज कर दिया है। दिलचस्प बात यह है कि पहले ही पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार और राज्यपाल पुरोहित के बीच अलग-अलग मुद्दों पर विवाद और तनातनी की स्थिति बनी हुई है। इस बीच कुछ अहम नियम भी इस मामले में अड़चन बने हैं।

मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच टकराव
अधिकारियों के अनुसार तय नियमों के तहत किसी भी राजनीतिक दल को शहर में जमीन आवंटित करने के दो आधार हो सकते हैं। पार्टी को राष्ट्रीय दल का दर्जा प्राप्त हो और पिछले 20 साल से चंडीगढ़ में दल का निर्वाचित सांसद हो। आप राष्ट्रीय पार्टी की सूची में तो शामिल है, लेकिन शहर में पार्टी का सांसद नहीं है। जबकि पार्टी पिछले दो लोकसभा चुनाव लड़ चुकी है।
शहर में कांग्रेस, भाजपा, शिअद, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और इनेलो के कार्यालय पहले से हैं। इन दलों को कार्यलय भवन के लिए जमीन मिली हुई है। मगर अधिकारियों के मुताबिक साल 2005 में यूटी प्रशासन ने जमीन आवंटन के नियमों में संशोधन किया था। उधर, अब प्रशासन की ओर से पार्टी की मांग खारिज किए जाने के बाद मुख्यमंत्री और राज्यपाल (चंडीगढ़ प्रशासक) के बीच टकराव और ज्यादा बढ़ना तय माना जा रहा है। कार्यालय के लिए जमीन देने की मांग खारिज होने पर आप नेता प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगा रहे हैं।

हरियाणा को विधानसभा के लिए जमीन का मामला भी गरम
हरियाणा सरकार को विधानसभा की नई इमारत के लिए जमीन देने का मामला पहले ही गरम है। जमीन की अदला बदली की नीति पर भू आवंटन का प्रस्ताव है। हरियाणा को जमीन देने के मामले में प्रशासन ने उपायुक्त विनय प्रताप सिंह के नेतृत्व में कमेटी का गठन किया है।
कमेटी की अगले सप्ताह बैठक होने वाली है। पिछली बैठक में रेलवे स्टेशन के पास विधानसभा के लिए 10 एकड़ जमीन देने का जो प्रस्ताव है, उसके बदले हरियाणा ने सकेतड़ी में 12 एकड़ जमीन यूटी प्रशासन को देने का आफर दिया है।
जमीन का सीमांकन भी हरियाणा की ओर से किया जा चुका है। इसकी रिपोर्ट अगली बैठक में प्रस्तुत की जाएगी। विधानसभा के लिए जमीन देने के मामले का पंजाब की आप सरकार और कांग्रेस के नेता विरोध कर चुके हैं। इन दलों के नेताओं ने पिछले दिनों प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित से हरियाणा को जमीन देने के प्रस्ताव को खारिज करने की मांग की थी।
सस्ती जमीन नहीं दी जा सकती
प्रशासन का कहना है कि शहर में गृह मंत्रालय के आदेश के बाद किसी को भी जमीन सस्ती कीमत पर नहीं दी जा सकती। जमीन केवल नीलामी के जरिये ही दी जाएगी। प्रशासन ने पिछले 10 वर्षों से शहर में किसी को भी जमीन अलाट नहीं की है। पंजाब में सभी सात राज्यसभा के सदस्य आप के हैं।
जबकि लोकसभा का एक सदस्य है। साल 2005 में प्रशासन ने राजनीतिक दलों को चंडीगढ़ में भूमि आवंटन के लिए नियमों में संशोधन किया था। इसके बाद उपरोक्त दोनों नियम जोड़ दिए गए थे। उधर, चंडीगढ़ के एडवाइजर डा. धर्मपाल का कहना है यूटी प्रशासन नियमों के तहत ही किसी दल को जमीन देने पर निर्णय ले सकता है। तय नियम और शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है। आप शर्तों पर खरा नहीं उतर पा रही है।
