पंजाब में बाढ़ जैसे हालात, भाखड़ा और पोंग डैम का जलस्तर बढ़ा, गेट खुलते ही स्थिति हो सकती है और खराब
वंदे भारत-भारी बारिश के कारण पंजाब में जहां दो दिन में ही बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं. वहीं अब भाखड़ा और पोंग डैम का जलस्तर बढ़ने से हालात और खराब होने की आशंका जताई जा रही है… बांधों के गेट खुलते ही लोगों को भयावह मंजर का सामना करना पड़ सकता है. पंजाब में जुलाई माह में आवश्यक बारिश का दो दिन में ही 67 फीसदी पानी बरस चुका है. 25 हजार एकड़ से ज्यादा धान की फसल जलमग्न हो चुकी है. पूरे को हाई अलर्ट पर रखा गया है. मोहाली सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, जहां कई इलाकों में 2 फीट से अधिक बारिश का पानी भर गया है|
दोआबा और पूर्वी मालवा में भारी बारिश की आशंका
सतलुज, ब्यास और घग्गर नदियों का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है. रोपड़ हेडवर्क्स से पानी छोड़े जाने के कारण सतलुज नदी में जलस्तर काफी बढ़ गया है. जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से आसपास के इलाकों में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. आईएमडी ने 10 जुलाई को पंजाब के दोआबा और पूर्वी मालवा क्षेत्र में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका जताई है. रविवार को जालंधर और कपूरथला जिलों के तीन दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति देखी गई, ज अगस्त 2019 में सबसे भीषण बाढ़ आई थी, जब लगभग 25,000 एकड़ धान की फसल 2-3 फीट पानी में डूब गई थी|

जालंधर में 50 से ज्यादा गांव खाली करने के आदेश
जालंधर जिला प्रशासन ने क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण खेतों में पानी भर जाने के बाद बाढ़ की आशंका वाले 50 गांवों से लोगों को हटाने का आदेश दिया है. सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल के अनुसार सुल्तानपुर लोधी, गिद्दरपिंडी और लोहियां में 25,000 एकड़ में धान की फसल जलमग्न हो गई है और 35 से अधिक गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति है. शाहकोट – नकोदर बेल्ट में धान की खेती के तहत भूमि का बड़ा हिस्सा भी जलमग्न हो गया. जालंधर के डीसी ने नकोदर, शाहकोट, लोहियां और फिल्लौर के सभी बाढ़ संवेदनशील गांवों में रात्रि गश्त का भी आदेश दिया है. दारेवाल गांव से लेकर फिल्लौर तक धुस्सी बांध के पास रहने वाले किसानों, जिसमें 100 से अधिक गांव हैं, का दावा है कि बांध के दोनों किनारों पर 70 प्रतिशत धान की फसलपानी में डूबी हुई है|
7 फीट बढ़ गया पोंग डैम का पानी
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक ब्यास नदी पर बने पोंग बांध का जलस्तर एक ही दिन में 7 फीट बढ़ गया है. शनिवार की सुबह यह 1,337 40 फीट था, जबकि रविवार शाम 7 बजे बांध का जल स्तर 1,344.33 फीट तक पहुंच गया. रविवार को बांध में पानी की आवक 3,37,411 क्यूसेक दर्ज की गई, जो रविवार सुबह 31,449 क्यूसेक थी. अधिकारियों ने भारी बारिश के कारण बांध से पानी नहीं छोड़ा है और बांध का जल स्तर अभी भी अधिकतम स्तर से काफी नीचे है. रविवार सुबह भाखड़ा और रणजीत सागर बांधों में क्रमश: 62,967 क्यूसेक और 27,913 क्यूसेक पानी की आवक दर्ज की गई थी, जबकि रविवार को इन दोनों बांधों से क्रमश: 22,442 क्यूसेक और 410 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था. बारिश का सिलसिला यदि ऐसे ही जारी तो बांधों से पानी छोड़ने पर स्थिति और ज्यादा खराब हो सकती है|

कहां कितनी बारिश
आईएमडी चंडीगढ़ केंद्र के मुताबिक 8 जुलाई की सुबह से 9 जुलाई की सुबह तक 24 घंटों में चंडीगढ़ में 302.2 मिमी बारिश हुई है, जो पूरे जुलाई महीने में चंडीगढ़ में आवश्यक सामान्य बारिश से भी अधिक है. जुलाई में चंडीगढ़ में सामान्य बारिश की आवश्यकता 278.5 मिमी है. पंजाब में 8 जुलाई की सुबह से 9 जुलाई की सुबह तक सबसे ज्यादा बारिश नंगल बांध के पास रोपड़ में 282.5 मिमी दर्ज की गई, इसके बाद नवांशहर के बुल्लोवाल सौंकरी में 270 मिमी, टिहरी गुरदासपुर में 245 मिमी, पठानकोट के माधोपुर में 187 मिमी, श्री आनंदपुर साहिब में 185 मिमी बारिश दर्ज की गई है. गुरदासपुर के धारीवाल में 167 मिमी, पठानकोट के मलिकपुर में 153 मिमी, मोहाली के खरड़ में 143.7 मिमी, नवांशहर में 141.2 मिमी, गुरदासपुर में 141.2 मिमी, पठानकोट के शाहपुर कंडी में 138.8 मिमी, गुरदासपुर के अलीवाल में 127 मिमी, फिरोजपुर में 125 मिमी, मुकेरियां में 124 मिमी, बलाचौर में 124 मिमी 122.2 मिमी, पठानकोट के रणजीत सागर बांध पर 115.2 मिमी, तरनतारन के वल्टोहा में 105 मिमी, लुधियाना के मनिहाला में 100 मिमी, अमृतसर में 98.3 मिमी, कपूरथला में 95 मिमी, पटियाला के राजपुर और फिरोजपुर के तलवंडी भाई में 85 मिमी, बठिंडा में 75 मिमी, लुधियाना में 73 मिमी, जालंधर में 61 मिमी और बठिंडा में 50 मिमी बारिश दर्ज की गई है|
