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पटना बैठक से पहले ही गुत्थम-गुत्था विपक्ष? कांग्रेस पर हमलावर AAP और तृणमूल, दूसरे दलों ने बनाई दूरी

वंदे भारत- विपक्षी धड़े की 2 प्रमुख पार्टियां तृणमूल कांग्रेस (TMC) और आम आदमी पार्टी (AAP) ने बीते तीन दिनों में कांग्रेस को जिस तरह से निशाने पर लिया है, उसने पटना में 23 जून को होने वाली बैठक में विपक्षी एकता की कोशिशों पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं.

AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने राजस्थान में रविवार को हुई रैली में कांग्रेस और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधा. दरअसल राजस्थान में आम आदमी पार्टी इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों में पूरे दमखम के साथ उतरने की योजना बना रही है. वहीं केंद्र द्वारा लाए गए अध्यादेश के मुद्दे पर कांग्रेस ने अभी भी आधिकारिक तौर पर आप का समर्थन नहीं जताया है. इसके अलावा, अरविंद केजरीवाल राहुल गांधी से भी मिलने का समय नहीं ले पाए हैं. उधर तीन दिन पहले, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने भी चेतावनी दी थी कि अगर कांग्रेस पश्चिम बंगाल में उनके कट्टर प्रतिद्वंद्वी वाम दलों के साथ गठबंधन करना जारी रखती है तो वह उसके साथ नहीं खड़ी होंगी.

पटना की बैठक में शामिल होंगी ममता और केजरीवाल

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बीजेपी के खिलाफ विपक्षी एकता का ‘एक महत्वाकांक्षी फॉर्मूला’ बनाने का प्रयास कर रहे हैं. इसके लिए उन्होंने 23 जून पर पटना में एक बड़ी बैठक बुलाई है. इस बैठक में अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी भी शामिल होने वाली हैं, जहां राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और सीपीएम नेता सीताराम येचुरी के साथ उनका आमना-सामना हो सकता है.

आप के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि करीब दर्जन भर राज्यों में उनकी मौजूदगी है और इस साल के अंत में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनावों में कांग्रेस और बीजेपी दोनों को टक्कर देने की उनकी योजना है. इससे कांग्रेस के साथ उसका संघर्ष शुरू हो सकता है, जो उस पर बीजेपी विरोधी वोटों को विभाजित करने का आरोप लगा सकती है.

राज्य हित सर्वोपरि

तीन अन्य विपक्षी दल, तेलंगाना की भारत राष्ट्र समिति (BRS), आंध्र प्रदेश की तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और ओडिशा की बीजू जनता दल (BJD) 23 जून की पटना बैठक से दूर रह रहे हैं, क्योंकि वे अपने-अपने राज्यों में कांग्रेस के साथ मुकाबला कर रहे हैं. दरअसल बीआरएस, इस साल के अंत में होने वाले तेलंगाना के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और भाजपा को टक्कर देगी. पार्टी प्रमुख के. चंद्रशेखर राव ने हाल ही में कहा था कि कांग्रेस को बंगाल की खाड़ी में फेंक दिया जाना चाहिए. उधर खबर है कि टीडीपी सुप्रीमो चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश में लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के साथ दोबारा से गठबंधन करने की संभावना तलाश रहे हैं.

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मई में विपक्षी ताकतों को इकट्ठा करने के लिए नीतीश कुमार की देशव्यापी यात्रा के दौरान उनसे मुलाकात जरूर की थी, लेकिन उन्होंने इस धड़े में शामिल होने से इनकार कर दिया. दरअसल आगामी लोकसभा चुनाव के साथ ही राज्य के विधानसभा चुनाव भी हो सकते हैं, जहां उनका मुख्य मुकाबला कांग्रेस के साथ ही है. ऐसे में कांग्रेस के साथ कोई समझौता मुश्किल ही नजर आता है.

नवीन पटनायक ने हमेशा ही बीजेपी और कांग्रेस से समान दूरी बनाए रखी है. वहीं उत्तर प्रदेश की एक प्रमुख विपक्षी ताकत मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को पटना बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया है.संक्षेप में कहें तो विपक्ष के लिए छह प्रमुख राज्यों- पंजाब, दिल्ली, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में नीतीश कुमार के ‘एक सीट, एक विपक्षी उम्मीदवार’ के फॉर्मूले पर समझौता करना मुश्किल हो सकता है, जहां से लगभग 125 लोकसभा सीटें आती हैं. वहीं 23 जून को कांग्रेस पर ‘व्यापक समझ’ बनाने की जिम्मेदारी होगी, जहां वह कर्नाटक चुनाव में जीत के बाद बड़ा दल होने का धौंस न दिखाए.