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किसान आंदोलन में बच्चों के इस्तेमाल से हाई कोर्ट नाराज,बच्चों का ढाल के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है-हाई कोर्ट

वंदे भारत(हर्ष शर्मा) पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने किसान आंदोलन (Farmers protest) में बच्चों की मौजूदगी पर किसानों को फटकार लगाई है. कोर्ट ने इसे ‘शर्मनाक’ बताते हुए कहा कि बच्चों को ढाल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है.

7 मार्च को हाई कोर्ट ने किसानों के प्रदर्शन से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणी की. साथ ही हाई कोर्ट ने युवा किसान शुभकरण की मौत मामले में न्यायिक जांच का आदेश दिया है.

बीती 13 फरवरी से किसान कई मांगों को लेकर पंजाब और हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं. हरियाणा सरकार ने आंदोलन में मौजूद बच्चों और महिलाओं की तस्वीर कोर्ट में जमा किया था. तस्वीरों को देखकर जस्टिस संधावालिया और जस्टिस लपिता बनर्जी की बेंच किसानों पर भड़क पड़ी.

इंडिया टुडे की कमलजीत संधू की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने कहा कि ये बहुत ही शर्म की बात है कि प्रदर्शन में बच्चों को आगे किया जा रहा है. बेंच ने कई बार इसे शर्मनाक बताते हुए कहा

बच्चों का ढाल के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है. ये शर्मनाक है. बच्चों की उम्र देखिये. आप कैसे माता-पिता हैं? आप वहां कोई जंग करने जा रहे हैं? यह पंजाब की संस्कृति नहीं है. आपके नेताओं को गिरफ्तार कर चेन्नई भेजा चाहिए

शुभकरण मामले में कोर्ट ने क्या आदेश दिया?

किसानों के साथ कोर्ट ने राज्य सरकारों को भी नहीं छोड़ा. कहा कि इस पूरे मामले में दोनों राज्य अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभाने में नाकाम रहे हैं. हरियाणा सरकार से पूछा गया कि 21 फरवरी को प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग करना कैसे सही था? खनौरी बॉर्डर पर उस दिन पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी. 21 फरवरी को ही खनौरी बॉर्डर पर बठिंडा के रहने वाले शुभकरण सिंह की मौत हो गई थी.

हरियाणा सरकार की तरफ से पेश हुए वकील ने बताया कि स्थिति हिंसक हो गई थी, इसलिए पुलिस को वाटर कैनन, लाठी चार्ज, पेलेट और रबड़ बुलेट्स का इस्तेमाल करना पड़ा. सरकार ने दावा किया कि इस दौरान 15 पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे.