बुजुर्गों से पहाड़ी भाषा में संवाद करते अनुराग ठाकुर
11..jan..केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का ज़मीनी जुड़ाव और सहज व्यवहार कोई नया विषय नहीं है। राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहने के बावजूद उनका आम लोगों, विशेषकर बुजुर्गों के प्रति सम्मान और अपनापन हमेशा देखने को मिलता रहा है। हाल ही में सामने आए एक दृश्य में अनुराग ठाकुर अपने क्षेत्र के बुजुर्गों से पहाड़ी भाषा में आत्मीय बातचीत करते नज़र आए, जिसने एक बार फिर उनकी कार्यशैली और संस्कारों को उजागर किया।
अनुराग ठाकुर जब अपने संसदीय क्षेत्र या हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों का दौरा करते हैं, तो स्थानीय संस्कृति और भाषा को प्राथमिकता देते हैं। पहाड़ी भाषा में संवाद करते हुए वे न सिर्फ बुजुर्गों की बात ध्यान से सुनते हैं, बल्कि उनकी समस्याओं, अनुभवों और सुझावों को भी गंभीरता से लेते हैं। यही कारण है कि बुजुर्गों के चेहरे पर उनसे बात करते समय अपनापन और विश्वास साफ झलकता है।

इस तरह की संवाद शैली यह दर्शाती है कि अनुराग ठाकुर सत्ता और पद से ऊपर मानवीय रिश्तों को महत्व देते हैं। स्थानीय भाषा में बातचीत करना केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि उस क्षेत्र की संस्कृति और पहचान के प्रति सम्मान का प्रतीक भी है। बुजुर्गों के साथ सहज माहौल में हँसते-मुस्कुराते हुए बातचीत करना उनकी सरल और सुलभ छवि को और मजबूत करता है।
राजनीति में अक्सर औपचारिकता हावी रहती है, लेकिन अनुराग ठाकुर की यह शैली उन्हें आम नेताओं से अलग पहचान देती है। उनकी कार्यशैली में वर्षों से कोई बदलाव नहीं आया है—आज भी वे उसी विनम्रता और आत्मीयता के साथ लोगों से जुड़ते हैं। यही निरंतरता उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाती है और उनके नेतृत्व को विश्वसनीयता प्रदान करती है।
