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सोमनाथ मंदिर के 1000 वर्ष: मोरारी बापू का बड़ा बयान

17..jan..सोमनाथ मंदिर के 1000 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रसिद्ध आध्यात्मिक नेता मोरारी बापू ने सनातन धर्म की अटूट आस्था और उसकी जीवंत परंपरा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास में मंदिर की मूर्ति भले ही तोड़ी गई हो, लेकिन उसकी आत्मा और सनातन चेतना कभी नहीं टूटी। मोरारी बापू ने कहा, “हजार वर्ष बीत गए। मूर्ति तोड़ी गई, लेकिन आत्मा अटूट रही।” उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति और आस्था की ताकत का प्रतीक बताया, जिसने हर कठिन दौर में खुद को जीवित रखा। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर का 1000 वर्ष पूरा करना पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि सनातन धर्म और हिंदुत्व की निरंतरता का प्रतीक है, जो आक्रमणों और विनाश के बावजूद कायम रहा। मोरारी बापू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोमनाथ यात्रा की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “हमारे प्रधानमंत्री सही समय पर वहां गए, जो बहुत अच्छा था।” उनके अनुसार, ऐसे अवसरों पर शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति से सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना मजबूत होती है। भारत की पहचान पर बोलते हुए मोरारी बापू ने कहा कि भारत मूल रूप से सनातन धर्म की भूमि है। यहां की आध्यात्मिक परंपराएं हमेशा से विश्व कल्याण, सहिष्णुता और मानवता का संदेश देती रही हैं। उन्होंने सभी लोगों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा, “अगर सभी लोग मिलकर चलें, तो दुनिया और अधिक बेहतर और मंगलमय बन सकती है।” उनके अनुसार, आज के समय में एकता और सद्भाव ही सबसे बड़ी जरूरत है। मोरारी बापू ने कहा कि सोमनाथ मंदिर का इतिहास पूरी दुनिया को यह सिखाता है कि आस्था, धैर्य और एकता के बल पर किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है।

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