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MVA नाकाम, साथ आए राज और उद्धव… क्या BMC चुनाव में बीजेपी के लिए बनेंगे चुनौती?

23..दिसंबर..महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। महा विकास अघाड़ी (MVA) की रणनीति जहां अपेक्षित असर नहीं दिखा पाई, वहीं शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे के एक मंच पर आने की चर्चाओं ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। माना जा रहा है कि यह नजदीकी खास तौर पर आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है।

BMC देश की सबसे अमीर नगर निकाय मानी जाती है और लंबे समय तक इस पर शिवसेना का दबदबा रहा है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में बीजेपी ने मुंबई में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। ऐसे में अगर राज और उद्धव ठाकरे साथ आते हैं, तो मराठी वोट बैंक का एक बड़ा हिस्सा एकजुट हो सकता है, जो बीजेपी के लिए सीधी चुनौती बन सकता है।

राज ठाकरे की शहरी युवाओं और मराठी अस्मिता पर पकड़, वहीं उद्धव ठाकरे की संगठनात्मक विरासत—दोनों का गठजोड़ बीजेपी की रणनीति को कमजोर कर सकता है। हालांकि सवाल यह भी है कि क्या दोनों नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं और पुरानी दरारें इस गठबंधन को टिकाऊ बना पाएंगी।

फिलहाल, राजनीतिक संकेत साफ हैं—अगर ठाकरे बंधु साथ आते हैं, तो BMC चुनाव बेहद दिलचस्प और बीजेपी के लिए कठिन साबित हो सकते हैं।

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