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PAU की छात्राओं ने लगाए यौन उत्पीड़न के आरोप, राज्यपाल को लिखी चिट्ठी; VC गोसल बोले- ये बदमान करने की साजिश है

वंदे भारत– देश की प्रतिष्ठित पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में छात्राओं के यौन उत्पीड़न व छेड़छाड़ के आरोप सामने आने से हड़कंप मच गया है। यौन उत्पीड़न के मामले को लेकर विद्यार्थियों द्वारा अपनी पहचान गुप्त रखते हुए राज्यपाल बनवारी लाल को पत्र भी लिखा गया। हालांकि, इस वायरल हो रही चिट्ठी में विद्यार्थियों की पहचान गुप्त रखी गई है। यह पत्र रविवार को इंस्टाग्राम सहित दूसरे इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो गया।

पत्र के वायरल होते ही यूनिवर्सिटी के अधिकारियों व टीचिंग स्टाफ में हड़कंप मचा हुआ है। राज्यपाल को लिखी चिट्ठी में बीते दिनों हुई घटना के साथ-साथ पिछली कई यौन उत्पीड़न की घटनाओं की भी त्वरित जांच करने की अपील की गई है। राज्यपाल से विनम्र अनुरोध किया गया है कि इस मामले को व्यक्तिगत रूप से देखें। चिट्ठी में यह भी लिखा गया है कि यदि संभव हो तो भविष्य में भी ऐसे अपराधों की जांच करने के लिए एक स्थायी और स्वतंत्र संस्था का गठन किया जाए।


पहचान को गुप्त रखने की अपील

छात्रों ने राज्यपाल से खासतौर पर अपील की है कि उनकी पहचान को गुप्त रखा जाए, क्योंकि यदि विश्वविद्यालय के अधिकारियों को व्यक्तिगत विवरण के बारे में पता चलता है तो छात्रों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उधर, पीएयू के वीसी डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने कहा कि बीते दिनों उनके ध्यान में एक मामला आया था। जिस पर तुरंत कार्रवाई की गई है।
क्या लिखा है चिट्ठी में?

चिट्ठी में स्टूडेंटस ने राज्यपाल को लिखा, “हम आपका ध्यान यूनिवर्सिटी के अलग-अलग विभागों में छात्राओं के साथ से बढ़ रहे यौन उत्पीड़न व छेड़छाड़ के मामलों की तरफ लाना चाहते हैं। जिसे लेकर यूनिवर्सिटी प्रबंधन की तरफ से लगातार अनदेखी की जा रही है। यूनिवर्सिटी की छवि खराब होने के डर से वीसी सहित दूसरे सभी बड़े अधिकारी जानकारी होने के बावजूद इस तरह के मामलों को लेकर चुप्पी साधे हैं। हाल ही में एक स्नातक छात्रा ने एंटोमोलाजी विभाग के एक सहायक प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। पीड़ित ने तुरंत वीसी सतबीर सिंह गोसल सहित संबंधित अधिकारियों को घटना की सूचना दी, लेकिन हमेशा की तरह मामले को नजरअंदाज कर दिया गया और अपराधी के खिलाफ कोई कार्रवाई भी शुरू नहीं की गई। पीड़िता और उसके माता-पिता न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं।”


क्या कहते हैं वाइस चांसलर?

वीसी डॉ. सतबीर सिंह गोसल का कहना है कि यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए इंस्ट्राग्राम व अन्य जगहों पर जो पोस्ट डाली गई है, उसमें किसी का भी नाम नहीं है। यह यूनिवर्सिटी को बदनाम करने की साजिश है। भ्रष्टाचार, उत्पीड़न, चीटिंग को लेकर उनकी तरफ से जीरो टॉलरेंस है। हालांकि, इस गुमनाम चिट्ठी में लगाए गए आरोपों की जांच के निर्देश दे दिए गए हैं।