एनडीपीएस मामलों में गवाही के लिए नहीं पेश हो रहे पुलिस अधिकारी, डीजीपी से जवाब तलब
एनडीपीएस मामलों में गवाही के लिए नहीं पेश हो रहे पुलिस अधिकारी,
डीजीपी से जवाब तलब
वंदे भारत- नडीपीएस के मामलों में ट्रायल कोर्ट के समक्ष अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में पुलिसकर्मियों की गैरमौजूदगी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। साथ ही हरियाणा के डीजीपी से जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने हलफनामे के माध्यम से इस तरह की प्रथा को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी सौंपने का भी आदेश दिया है।

याचिका दाखिल करते हुए गुरदास सिंह ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से एनडीपीएस के मामले में जमानत देने की अपील की थी। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि केस फाइल को पढ़ने से बेहद खराब स्थिति का पता चलता है। 1985 मामलों में अभियोजन पक्ष के गवाह जमानती वारंट, गैर-जमानती वारंट, कुर्की आदेश के बावजूद अदालत में पेश नहीं हो रहे हैं।
रोचक बात यह है कि ऐसे अधिकतर गवाह पुलिस विभाग के कर्मचारी हैं। हाईकोर्ट ने इस मामले में हरियाणा के पुलिस महानिदेशक को अपना व्यक्तिगत हलफनामा दायर करने का निर्देश देते हुए सुझाव देने को कहा है। जिससे ऐसे मामलों के फैसले में देरी से बचने के लिए गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।

हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस प्रमुख से उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के तरीके और उपाय सुझाने को कहा, जो नोटिस के बावजूद अदालत में पेश होने में विफल रहे।
इससे पहले पिछले साल अक्तूबर में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पंजाब के मामले में गवाहों के रूप में पुलिस की गैर-उपस्थिति की इस समस्या से निपटने के लिए पंजाब के गृह सचिव और राज्य के डीजीपी को तलब किया था। पंजाब के शीर्ष अधिकारियों को तलब करते हुए हाईकोर्ट ने पाया था कि पंजाब में यह अभियोजन पक्ष के गवाह, जो ज्यादातर एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में आधिकारिक गवाह हैं, मुकदमे के दौरान पेश नहीं हो रहे हैं। इसके चलते साक्ष्यों को दर्ज करने में देरी हो रही है।
इसके बाद पंजाब के डीजीपी ने एनडीपीएस मामलों में आधिकारिक गवाह के रूप में पुलिस की उपस्थिति सुनिश्चित करने और उपस्थित न होने की स्थिति में दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में हाईकोर्ट में एक विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत किया था।


