हो सकता हैं बायकॉट, अमेरिका को होगा भारी नुकसान
जालंधर: अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ बढ़ोत्तरी को लेकर मामला लगातार गरमाता जा रहा है। वहीं आज आप के राज्यसभा सांसद व लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने अमेरिका को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर 27 अगस्त से भारतीय सामान पर 50% टैरिफ बढ़ोत्तरी लागू रहती है, तो लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी कैंपस में सभी अमेरिकी सॉफ्ट ड्रिंक और बेवरेज कंपनियों पर बैन लगाया जाएगा। गौरतलब है कि LPU भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट यूनिवर्सिटियों में से एक है। इस यूनिवर्सिटी में 40,000 से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं। डॉ. मित्तल LPU के फाउंडर और चांसलर हैं।
आप सांसद डॉ अशोक मित्तल ने कहा, एक भारतीय नागरिक होने के नाते मुझे लगता है कि बायकॉट का आह्वान करना बिल्कुल सही कदम है। बायकॉट के इस फैसले को दुनियाभर से लोगों का समर्थन मिला है। यहां तक कि अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी जैसे बड़े नेताओं ने भी टैरिफ बढ़ोत्तरी की निंदा की है और माना है कि अगर भारत बायकॉट करता है तो इसका नुकसान अमेरिका को भारत से ज्यादा होगा। डॉ. मित्तल के 7 अगस्त को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप को लिखे ‘ओपन लेटर’ के बाद आई है। उस पत्र में उन्होंने टैरिफ बढ़ोत्तरी को ‘अन्यायपूर्ण’ और नुकसानदायक बताया था।
उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से यह फैसला वापस लेने और आदेश थोपने के बजाय बातचीत के रास्ते पर लौटने की अपील की थी। उसी पत्र में डॉ. मित्तल ने एक सीधा सवाल रखा था, “अगर 146 करोड़ भारतीय अमेरिकी कारोबार पर रणनीतिक रोक लगाएं तो क्या होगा?” यही सवाल अब अंतरराष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन गया है और भारत की कई यूनिवर्सिटी व युवा संगठन भी अमेरिकी सामनों पर इसी तरह की पाबंदी लगाने पर विचार कर रहे हैं। डॉ. मित्तल ने बायकॉट का कारण बताते हुए कहा, “अमेरिका ने 50% टैरिफ बढ़ोत्तरी इसलिए की ताकि भारत को रूस के साथ व्यापार करने की सज़ा दी जा सके। यह दोहरा रवैया है! क्या अमेरिका और उसके सहयोगी खुद रूस से व्यापार नहीं कर रहे?
फिर भारत के लिए अलग नियम क्यों? इसी के साथ डॉ मित्तल ने दोहराया कि बहिष्कार (बायकॉट) का मकसद अमेरिका को बातचीत के लिए राजी करना है। डॉ. मित्तल ने कहा कि दबाव से ज़्यादा सहयोग ज़रूरी है। उन्होंने रचनात्मक बातचीत की अपील की ताकि टैरिफ बढ़ोत्तरी को वापस लेने पर खुलकर चर्चा हो सके और भारत के लिए न्यायपूर्ण फैसला लिया जा सके। सहयोग की अपील करते हुए भी डॉ. मित्तल ने साफ कहा, “भारत की आर्थिक गरिमा से कोई समझौता नहीं होगा। लवली प्रोफेसनल यूनिवर्सिटी से अमेरिकी बेवरेज कंपनियों को बैन करने का मेरा फैसला किसी एक ब्रांड के खिलाफ नहीं है, बल्कि अमेरिका को बातचीत के लिए राजी करने का एक प्रतीकात्मक कदम है। भारत अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मूक दर्शक नहीं है बल्कि आत्मसम्मान को केंद्र में रखकर उभरती ताकत है।
इसलिए रूस के साथ व्यापार करने पर भारत को सज़ा देने के लिए टैरिफ बढ़ोत्तरी करना बिल्कुल अस्वीकार्य है क्योंकि अमेरिका खुद रूस से व्यापार कर रहा है। अमेरिका को इस फैसले पर दोबारा विचार करना ही होगा और टैरिफ बढ़ोत्तरी के नियम को वापस लेना होगा।” राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल का नया बयान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अलास्का में मुलाकात के ठीक एक हफ़्ते बाद आया है। इस मुलाकात के बाद दो बातें साफ हो गईं हैं। पहली यह कि व्हाइट हाउस पर हर तरफ से दबाव बढ़ रहा है, यहां तक कि उनके अपने राजनीतिक नेताओं और ट्रेड एक्सपर्ट्स की ओर से भी टैरिफ बढ़ोत्तरी की आलोचना हो रही है। वे ट्रंप प्रशासन को समझा रहे हैं कि दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत को नुकसान न पहुंचाएं।
संदेश स्पष्ट है अब भारत किसी भी अन्यायपूर्ण व्यापारिक आदेश को स्वीकार नहीं करेगा। डॉ. मित्तल ने अमेरिका को चेताया कि भारत के साथ व्यापार में कोई भी असंतुलन, अमेरिका को भारत से कहीं ज्यादा नुकसान पहुँचाएगा। उन्होंने विश्व नेताओं से अपील की कि वे जीत-हार की राजनीति छोड़कर इस मसले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाएं। उन्होंने याद दिलाया कि कूटनीति की असली परीक्षा भाषणों में नहीं, बल्कि ऐसे हल निकालने में है जिससे सभी पक्षों को फायदा हो। टैरिफ बढ़ोत्तरी के खिलाफ अपने मजबूत रुख और बार-बार रचनात्मक वैश्विक बातचीत की अपील के साथ डॉ. अशोक मित्तल वैश्विक पटल पर भारत की आर्थिक गरिमा के सबसे परिपक्व और बेबाक समर्थकों में गिने जा रहे हैं। उनका कहना है कि भारत सहयोग के लिए तैयार है, लेकिन अपने सम्मान के साथ समझौता कभी नहीं करेगा।
