Vande Bharat 24 Exclusive
कांग्रेस में बड़ा खेल चल रहा है। लुधियाना वेस्ट विधान सभा क्षेत्र में हो रहे उप चुनाव को लेकर कांग्रेस दो हिस्सों में बंटती जा रही है। लुधियाना वेस्ट से कांग्रेस के उम्मीदवार व कार्यकारी प्रधान भारत भूषण आशु, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और राणा गुरजीत सिंह ने रविवार को कांग्रेस छोड़ कर भाजपा गए कंलप्रीत कड़वल और दाखा के करण वड़िंग को रविवार को पार्टी ज्वाइन करवाई तो सोमवार को प्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पार्टी के प्रदेश महासचिव कैप्टन संदीप संधू ने फिल्लौर विधान सभा से निलंबित चल रहे विधायक चौधरी विक्रमजीत सिंह की घर वापसी करवा दी।
अहम बात यह हैं कि कड़वल और करण वड़िंग ने 2024 में हुए लोक सभा चुनाव के दौरान लुधियाना में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का विरोध किया था और उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली थी।
वहीं, चौधरी विक्रमजीत ने जालंधर में चरणजीत सिंह चन्नी का विरोध किया था। जिसके बाद पार्टी ने उन्हें 24 अप्रैल 2024 को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निलंबित कर दिया था। बता दें कि इसी चुनाव के दौरान आशु और वड़िंग के बीच दरार पड़ गई थी।
दरार की असली वजह आशु के विरोध के बावजूद बैंस बंधुओं को राजा द्वारा पार्टी में लाना था। आशु की राजा के साथ नाराजगी की शुरूआत भी बैंस ब्रदर्स की कांग्रेस में एंट्री को लेकर हुई। क्योंकि आशु को लगता था कि राजा बैंस ब्रदर्स को उनका कद कम करने के लिए पार्टी में लाए। जबकि राजा अकेले आशु के भरोसे नहीं रहना चाहते थे। सिमरजीत बैंस आत्मनगर से अपनी पार्टी के लिए चुनाव लड़ते थे। जबकि कड़वल कांग्रेस के उम्मीदवार होते थे।
बैंस के कांग्रेस में आने के बाद कड़वल बिट्टू के साथ भाजपा में चले गए थे। करण वड़िंग भी दाखा से टिकट के दावेदार थे लेकिन यहां पर जोर पार्टी के महासचिव कैप्टन संदीप संधू का चल रहा था। जिसके कारण वड़िंग भी भाजपा चले गए थे। उप चुनाव के दौरान बगैर पार्टी के प्रधान की अनुमति के आशु और चन्नी ने कड़वल और करण वड़िंग को पार्टी ज्वाइन करवा दी।
जिसके जवाब में सोमवार को ही राजा वड़िंग और कैप्टन संदीप संधू ने चौधरी विक्रमजीत का निलंबन खत्म करके उनकी घर वापसी करवा दी। वीरवार को आशु के नामांकन पत्र भरने के दौरान भले ही राजा वड़िंग ने उपस्थित होकर एकता का संदेश दिया लेकिन पार्टी के अंदर चल रही खींचतान रविवार को ही सामने आ गई।
पार्टी सूत्र बताते हैं कि करण वड़िंग के पार्टी में आने को लेकर प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल की भी रजामंदी नहीं था। वह राजा वड़िंग की हामी के बगैर करण को पार्टी में नहीं लेना चाहते थे।
