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लोकसभा में ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष: राजनाथ सिंह ने कहा इसके साथ हुई नाइंसाफ़ी को समझना ज़रूरी”

लोकसभा में ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित विशेष चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस ऐतिहासिक गीत से जुड़े विवादों और ऐतिहासिक संदर्भों पर विस्तृत टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ के साथ जो नाइंसाफ़ी हुई, उसे समझना इसलिए भी ज़रूरी है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ उन परिस्थितियों और सोच को समझ सकें, जिसने इसे हाशिये पर धकेला।

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह कोई एकमात्र घटना नहीं थी बल्कि उस राजनीति की शुरुआत का हिस्सा थी जिसे उन्होंने “तुष्टिकरण” करार दिया। सिंह ने आरोप लगाया कि इसी राजनीतिक दृष्टिकोण ने आगे चलकर देश के विभाजन की भूमिका तैयार की और स्वतंत्रता के बाद सांप्रदायिक सद्भाव पर प्रतिकूल प्रभाव डाला।

उन्होंने कहा कि आज देश “वंदे मातरम की इज़्ज़त वापस ला रहा है”, लेकिन कुछ लोग इस प्रयास को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के बीच टकराव के रूप में पेश करने की कोशिश कर सकते हैं। सिंह के अनुसार यह दृष्टिकोण “बाँटने वाली सोच” को दर्शाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार दोनों—राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान—का समान सम्मान करती है।

चर्चा के दौरान कई सांसदों ने भी ‘वंदे मातरम’ के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व पर अपने विचार रखे। सदन में इस अवसर को देश के स्वतंत्रता संग्राम में गीत की भूमिका के सम्मान और स्मरण के रूप में देखा गया।

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