चन्नी की जालंधर में गतिविधियों को लेकर कांग्रेस में बगावत
चन्नी के जन्म दिन पर विधायक विक्रमजीत चौधरी का तीखा वार
कहा-जालंधर से चन्नी का क्या लेना देना
बकरी चोने वाले को जालंधर के लोग पसंद नहीं करेंगे

वंदे भारत(हर्ष शर्मा) पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का मंगलवार को जन्म दिन था। चन्नी ने अपना जन्म दिन अपने इलाके चमकौर साहिब को छोड़ कर जालंधर में काटा। केक आदमपुर के विधायक सुखविंदर कोटली की अगुवाई में काटा गया और केक पर पूर्व मुख्यमंत्री की जगह यह लिखा गया था साडा चन्नी जालंधर। बस साडा चन्नी जालंधर लिखा जाना ही पार्टी के भीतर विवाद बन गया।
दरअसल जालंधर में कांग्रेस की विरासत पर राज करने वाले चौधरी परिवार को यह रास नहीं आया। 2014 व 2019 को जालंधर की सीट से चौधरी संतोख सिंह ने बड़ी जीत प्राप्त की थी और चौधरी संतोख सिंह की शहादत भी राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्र के दौरान पार्टी के प्रति नारेबाजी करते हुई थी। यही कारण था कि उपचुनाव की टिकट चौधरी संतोख सिंह की पाळी करमजीत कौर चौधरी को दी गई थी। मगर वह चुनाव हार गई थी। अब अचानक से पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने जालंधर में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। ऐसा लगता है कि जैसे चन्नी को हाईकमान ने जालंधर सीट से चुनाव लड़ने की हरी झंडी दे दी हो। पिछले कई दिनों से चन्नी ने जालंधर में डेरा डाला हुआ है और सभी सीनियर नेताओं से मीटिंग कर रहे हैं। मंगलवार को चरणजीत सिंह चन्नी का जन्म दिन था और जन्म दिन भी उन्होंने जालंधर में मनाया। इस मौके पर केक भी काटा गया और केक पर लिखा गया साडा चन्नी जालंधर।
बस यहीं से विवाद शुरू हो गया। कांग्रेस के विधायक व दिवंगत चौधरी संतोख सिंह के बेटे विक्रमजीत सिंह चौधरी ने कहा कि चन्नी का जालंधर और दोआबा से क्या नाता। उन्हें अपने हलके चमकौर साहिब में जोर लगाना चाहिए। विक्रमजीत चौधरी का कहना है कि पिछले कई दशकों से उनका परिवार कांग्रेस का सच्च सिपाही रहा है और उनके पिता ने अंतिम सांस भी कांग्रेस के झंडे के नीचे ली थी। ऐसे में विश्वास है कि हाईकमान एक बार फिर से उनके परिवार को आशीर्वाद देगा। मगर चरणजीत सिंह चन्नी जानबूझ कर जालंधर में गतिविधियां बढ़ाकर भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। विक्रमजीत सिंह चौधरी ने तो यहां तक कह दिया कि अगर वह इतने ही बड़े दलित नेता होते तो बतौर मुख्यमंत्री चुनाव लड़ कर चमकौर साहिब से वह चुनाव न हारते। वह जिस तरह से बकरी चोने की बात करते हैं, टेंट लगाने की बात करते हैं, इसे जालंधर के लोग पसंद नहीं करेंगे। कुल मिलाकर कांग्रेस ने अभी तक चाहे पंजाब में एक भी सीट से प्रत्याशी का ऐलान नहीं किया है, मगर पंजाब की कांग्रेस की सियासत में बगावत का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस के नेता ही एक दूसरे की टांग खींचने में जुट गए हैं। अब देखना होगा कि बगावत की यह जो आग धीरे धीरे सुलगने लगी है उस पर हाईकमान कैसे कंट्रोल कर पाता है। क्योंकि अगर हाईकमान ने इस बगावत को थामने का प्रयास नहीं किया तो विधानसभा चुनावों की तरह की पंजाब में कांग्रेस का लोकसभा चुनाव में भी हाल होगा।

