अरोड़ा नर्सिंग होम के डॉक्टर पर लगे गंभीर इल्ज़ाम, सिविल सर्जन कार्यकाल पर उठाए बड़े सवाल
वंदे भारत- फिल्लौर के अरोड़ा नर्सिंग होम के डॉक्टर सतीश अरोड़ा पर गलत स्कैनिंग रिपोर्ट देने के आरोप लगे थे, जिसके बाद यह मामला पुलिस प्रशासन और सिविल सर्जन कार्यकाल में पहुंचा था।
लेकिन सिविल सर्जन कार्यकाल कि इस प्रति दिल्ली कार्रवाई सामने आ रही है।
डॉक्टर द्वारा मरीज के गुर्दे में 6.2 एमएम की पथरी बताकर गलत रिपोर्ट देने के बाद भी सिविल सर्जन कार्यालय इतने ढीले कार्रवाई पर सवाल खड़े होते हैं। इसलिए फिल्लौर के गन्ना पिंड के रहने वाले रामजी दास ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से इंसाफ की गुहार लगाई है, उन्होंने आरोप लगाए हैं कि सिविल सर्जन कायार्लय के अधिकारी डॉ. सतीश अरोड़ा का साथ दे रहे हैं। बुधवार को रामजी दास अपनी पत्नी रीटा कुमारी के साथ सिविल सर्जन कार्यालय में पहुंचे और जांच कर रही कमेटी के समक्ष पेश हुए। सिविल सर्जन द्वारा बनाई गई जांच कमेटी में जिला परिवार भलाई अफसर डॉ. रमन गुप्ता, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. महिंदर प्रताप सिंह और डॉ. गोरव सेठी को शामिल किया गया है। कमेटी के चेयरमैन डॉ. रमन गुप्ता को बनाया है।

रामजी दास ने जांच कमेटी को दिए बियान में कहा है कि फिल्लौर के अरोड़ा नर्सिंग होम के डॉ. सतीश अरोड़ा ने उसकी पत्नी रीटा के गुर्दे में 6.2 एमएम की पथरी बताई और उसे ऑपरेशन करवाने के लिए डराया था। जबकि अन्य तीन स्कैनिंग सेंटरों से करवाई गई स्कैनिंग रिपोर्ट में मामूली सोजिश बताई गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉक्टर ने जानबूझ कर उन्हें गलत रिपोर्ट बनाकर दी और ऑपरेशन का डर दिखाकर पैसे वसूलने का काम करना चाहता था। रामजी दास ने आरोप लगाते हुए कहा कि जांच कमेटी में शामिल डॉ. महिंदर प्रताप सिंह और डॉ. गोरव सेठी जानबूझ कर उनको प्रश्नों में उलझा रहे थे, जबकि अरोड़ा नर्सिंग होम के डॉ. सतीश अरोड़ा ने अपनी स्कैनिंग रिपोर्ट में उनकी पत्नी रीटा कुमारी के गुर्दे में 6.2 एमएम की पथरी बताई है, फिर भी जांच कमेटी के डॉक्टर पता नहीं क्यों डॉ. सतीश अरोड़ा का साथ देते हुए नजर आ रहे थे। रामजी दास ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और जिला प्रशासन से इंसाफ की गुहार लगाई है।

बता दें अरोड़ा नर्सिंग होम के डॉ. सतीश अरोड़ा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया था। वहीं जांच कमेटी के चेयरमैन डॉ. रमन गुप्ता ने इस मामले से संबंधित कोई भी बियान मीडिया में देने से साफ तौर पर मना कर दिया। सिविल सर्जन डॉ. रमन शर्मा ने कहा कि अभी मामले की जांच की जा रही है और की प्रमुखता के साथ जांच की जाएगी, अगर जांच में डॉक्टर दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी।

