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पंजाब के राज्यपाल बोले- पत्रों का जवाब देने के लिए बाध्य हैं मुख्यमंत्री, वर्ना होगा संविधान का उल्लंघन

वंदे भारत पंजाब के राज्यपाल व मुख्यमंत्री भगवंत मान में चल रही खींचतान और गहरी हो गई है। राज्यपाल ने सोमवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान को एक पत्र लिखकर न केवल विधानसभा के विशेष सत्र में पास किए गए बिलों पर अपनी राय व्यक्त की है, बल्कि सरकार को भ्रष्टाचार के मामलों की शिकायतों के भी संकेत दिए हैं।

इससे साफ है कि आने वाले दिनों में पंजाब सरकार और राज्यपाल के बीच का विवाद और गहरा होगा।

 

राज्यपाल ने कहा है कि विधानसभा के विशेष सत्र को लेकर उन्होंने जो कहा था, वह उनकी नहीं, बल्कि कानूनी विशेषज्ञों की राय थी। राज्यपाल ने कहा कि विधानसभा में मेरे जिन पत्रों को आप लव लेटर्स कह रहे थे, उनका जल्दी जवाब दें। संविधान के मुताबिक मुख्यमंत्री राज्यपाल के दिए पत्रों का जवाब देने के लिए बाध्य हैं। मेरे पत्रों का उत्तर न देना संविधान के आर्टिकल 167 का उल्लंघन है।

 

राज्यपाल ने कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि मीडिया में कहा जा रहा है कि राज्यपाल ने विधानसभा सत्र को लेकर कोई कानूनी राय नहीं ली थी। उन्होंने कहा कि आपकी ध्यान में लाना चाहता हूं कि 19 और 20 जून को विधानसभा सत्र बुलाया गया था उसको लेकर संविधान के एक विशेषज्ञ से राय ली गई थी। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि आपने राज्यपाल की विधानसभा में आलोचना की है, जो लोगों को पसंद नहीं आई, क्योंकि मुख्यमंत्री को विधानसभा में अपने पद के अनुसार एसी बयानबाजी करना शोभा नहीं देता।

 

राज्यपाल पुरोहित ने कहा है कि वह इस बात को ध्यान में रखें कि वह बतौर राज्यपाल एक संवैधानिक अथॉरिटी हूं, जिसे भारत के राष्ट्रपति ने नियुक्त किया है। मुझे यह सुनिश्चित करने का कर्त्तव्य सौंपा गया है कि निष्पक्ष, ईमानदार प्रशासन हो और यह नजर रखूं कि भ्रष्टाचार मुक्त सरकार हो। पिछले दिनों के दौरान उनके पास भ्रष्टाचार को लेकर कई शिकायतें आई हैं। जिस पर मेरा आपसे अनुरोध है कि बिना देरी किए उनका मुझे जवाब भेज दें। अन्यथा, इसे संविधान का घोर उल्लंघन माना जाएगा।