Punjab

संसद में ‘वंदे मातरम’ बहस — ममता बनर्जी का हमला

पुस्‍तकालीन सत्र में वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर चल रही विशेष बहस के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र की राजनीति व विचारधारा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुछ भाजपा नेता “नेताजी (सुभाष चंद्र बोस)” को पसंद नहीं करते — और अगर आप नेताजी, महात्मा गांधी या राजा राममोहन राय जैसी विभूतियों को नहीं मानते, “तो आप किसको पसंद करते हैं?”

ममता ने इस टिप्पणी को ऐसे समय में किया जब पार्लियामेंट में ‘वंदे मातरम’ और ‘जय हिंद’ जैसे नारे लगाना विवादित हो गया है। उन्होंने कहा कि इन नारों और गीतों को रोकना, बंगाल की पहचान और आज़ादी-संघर्ष की विरासत को भुलाने जैसा है। उनका आरोप था कि कुछ लोग इसे राजनीतिक रूप से उपयोग कर बंगाल और देश की अस्मिता को खोखला करना चाहते हैं।

इस बहस की बिसात पर ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक महत्व से जुड़े कई सवाल उठ रहे हैं — जैसे कि क्या उसे सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य करना चाहिए? कौन-कौन इस गीत को राष्ट्रवाद की कसौटी मानता है और किनके लिए यह चिंताजनक है? बहस में भाग लेने वाले दलों की प्रतिक्रियाएं विशेषकर भाजपा व विपक्ष की पर भी निगाहें टिकी हैं

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