जसप्रीत बुमराह की टेस्ट वापसी से पहले BCCI का बड़ा प्लान, पहले खेलना होगा रेड-बॉल मैच
जसप्रीत बुमराह की टेस्ट क्रिकेट में वापसी को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता। न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज से पहले चयनकर्ता चाहते हैं कि भारत का स्टार तेज गेंदबाज एक प्रतिस्पर्धी रेड-बॉल मुकाबले में अपनी फिटनेस और मैच लय साबित करे। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके लिए रणजी ट्रॉफी सबसे संभावित विकल्प हो सकता है। अगर घरेलू मुकाबला संभव नहीं हुआ तो इंडिया A के साथ रेड-बॉल मैच भी विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक बुमराह ने अपना पिछला टेस्ट नवंबर 2025 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला था। इसके बाद उन्होंने सीमित ओवरों के क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।
जसप्रीत बुमराह को रेड-बॉल मैच क्यों खेलना होगा?
टेस्ट क्रिकेट और टी20 क्रिकेट में तेज गेंदबाज की शारीरिक मांग बिल्कुल अलग होती है। टी20 मुकाबले में गेंदबाज को आमतौर पर सीमित ओवर ही डालने होते हैं, जबकि टेस्ट मैच में कई दिनों तक गेंदबाजी करनी पड़ सकती है। एक तेज गेंदबाज को मैच के दौरान लंबे स्पेल डालने के साथ-साथ लगातार कई दिन मैदान पर रहना पड़ता है।
इसी वजह से चयनकर्ता चाहते हैं कि जसप्रीत बुमराह सीधे टेस्ट मैच में उतरने से पहले वास्तविक मैच परिस्थितियों में अपनी तैयारियों को परखें। अभ्यास सत्र और फिटनेस टेस्ट से खिलाड़ी की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है, लेकिन प्रतिस्पर्धी मुकाबले में गेंदबाजी करने से ही यह पता चलता है कि शरीर लंबे स्पेल और लगातार गेंदबाजी का भार झेलने के लिए कितना तैयार है।
चोट का इतिहास भी बनी बड़ी वजह
बुमराह के मामले में फिटनेस हमेशा महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। उनके करियर में चोटों के कारण कई बार उन्हें क्रिकेट से दूर रहना पड़ा है। ऐसे में BCCI और चयनकर्ता उनकी वापसी को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतना चाहते हैं।
खासकर टेस्ट क्रिकेट में तेज गेंदबाज पर पड़ने वाला वर्कलोड काफी ज्यादा होता है। मैच के तीसरे या चौथे दिन भी अगर टीम को बुमराह से लंबे स्पेल की जरूरत पड़ती है, तो उनके शरीर पर काफी दबाव आ सकता है। इसलिए बोर्ड पहले यह देखना चाहता है कि वह रेड-बॉल क्रिकेट में अपनी पूरी क्षमता के साथ गेंदबाजी कर पा रहे हैं या नहीं।
रणजी ट्रॉफी हो सकता है पहला विकल्प
रिपोर्ट्स के अनुसार, चयनकर्ताओं की प्राथमिकता जसप्रीत बुमराह को रणजी ट्रॉफी में एक मुकाबला खिलाने की हो सकती है। घरेलू फर्स्ट-क्लास क्रिकेट का मुकाबला उन्हें टेस्ट क्रिकेट जैसी परिस्थितियों में गेंदबाजी करने का मौका देगा।
इस मैच के दौरान उनके गेंदबाजी वर्कलोड, स्पेल की लंबाई और मैच के अलग-अलग चरणों में उनकी फिटनेस पर नजर रखी जा सकती है। इससे चयनकर्ताओं को न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज से पहले उनकी स्थिति का बेहतर आकलन करने में मदद मिलेगी।
हालांकि रणजी ट्रॉफी का विकल्प पूरी तरह कार्यक्रम पर निर्भर करेगा। भारतीय टीम का अंतरराष्ट्रीय शेड्यूल काफी व्यस्त है और बुमराह की सीमित ओवरों की जिम्मेदारियां भी हो सकती हैं।
इंडिया A के साथ रेड-बॉल मैच भी विकल्प
अगर रणजी ट्रॉफी में बुमराह को शामिल करना संभव नहीं होता है, तो इंडिया A के साथ रेड-बॉल मुकाबला दूसरा विकल्प हो सकता है। इस तरह के मैच में उन्हें टेस्ट क्रिकेट के अनुकूल गेंदबाजी वर्कलोड हासिल करने का अवसर मिलेगा।
चयनकर्ताओं का मुख्य उद्देश्य किसी भी कीमत पर एक मैच खिलाना नहीं, बल्कि टेस्ट सीरीज से पहले बुमराह को पर्याप्त प्रतिस्पर्धी रेड-बॉल क्रिकेट उपलब्ध कराना है।
न्यूजीलैंड सीरीज में बुमराह की भूमिका अहम
भारत के न्यूजीलैंड दौरे में दो टेस्ट मुकाबले निर्धारित हैं। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार पहला टेस्ट 18 नवंबर 2026 को वेलिंगटन के Basin Reserve में खेला जाना है।
विदेशी परिस्थितियों में भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण के लिए बुमराह की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। नई गेंद से विकेट लेने के अलावा वह पुरानी गेंद से भी टीम के लिए अहम भूमिका निभा सकते हैं।
यही कारण है कि BCCI चाहता है कि वह टेस्ट सीरीज में तभी उतरें जब उनकी फिटनेस और मैच तैयारी पूरी तरह संतोषजनक हो।
टेस्ट क्रिकेट में कोई जोखिम नहीं लेना चाहता BCCI
जसप्रीत बुमराह भारत के सबसे महत्वपूर्ण तेज गेंदबाजों में शामिल हैं। ऐसे खिलाड़ी को बिना पर्याप्त रेड-बॉल तैयारी के सीधे टेस्ट मैच में उतारना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए बोर्ड की कोशिश है कि उनकी वापसी को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाए।
पहले फिटनेस और अभ्यास, फिर प्रतिस्पर्धी रेड-बॉल मुकाबला और उसके बाद टेस्ट चयन—यह रणनीति बुमराह के वर्कलोड को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है।
बुमराह के लिए बड़ा टेस्ट
बुमराह के लिए रेड-बॉल मुकाबला सिर्फ वापसी का मैच नहीं होगा, बल्कि यह उनकी टेस्ट तैयारियों की असली परीक्षा भी होगी। कितने ओवर गेंदबाजी कर पाते हैं, लगातार स्पेल के बाद शरीर कैसी प्रतिक्रिया देता है और मैच के अगले दिन उनकी रिकवरी कैसी रहती है—इन सभी पहलुओं पर नजर रखी जा सकती है।
अगर वह इस परीक्षा में सफल रहते हैं, तो न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में उनकी वापसी का रास्ता और मजबूत हो सकता है। फिलहाल BCCI का फोकस साफ दिखाई देता है—बुमराह की वापसी में जल्दबाजी नहीं, बल्कि पूरी तैयारी और फिटनेस को प्राथमिकता।

