पिथौरागढ़ दुष्कर्म मामला: जेल से छूटते ही 5 साल की बच्ची के साथ दरिंदगी, आरोपी गिरफ्तार

पिथौरागढ़ दुष्कर्म मामला उत्तराखंड से सामने आई एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना है। यहां पांच साल की मासूम बच्ची के कथित अपहरण और दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। हैरानी की बात यह है कि आरोपी कुछ ही सप्ताह पहले एक अन्य नाबालिग से जुड़े यौन अपराध के मामले में जेल से रिहा हुआ था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बच्ची को सुरक्षित बरामद किया और मेडिकल जांच के बाद दुष्कर्म की पुष्टि होने पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पोक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया।
पिथौरागढ़ दुष्कर्म मामला: कैसे सामने आई वारदात?
23 जून को पिथौरागढ़ कोतवाली में पांच वर्षीय बच्ची के लापता होने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर चार विशेष जांच टीमें गठित कीं। टीमों ने शहर के सरकारी और निजी संस्थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली।
जांच के दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति बच्ची को अपने साथ ले जाता हुआ दिखाई दिया। इसी आधार पर पुलिस ने व्यापक तलाश अभियान चलाया और बच्ची को टनकपुर तिराहे के पास से सुरक्षित बरामद कर लिया। बाद में मेडिकल जांच में दुष्कर्म की पुष्टि हुई, जिसके बाद पुलिस ने मामले में गंभीर धाराएं जोड़ दीं।
आरोपी की पहचान और आपराधिक रिकॉर्ड
पिथौरागढ़ दुष्कर्म मामला में गिरफ्तार आरोपी की पहचान 35 वर्षीय होशियार सिंह के रूप में हुई है, जो पिथौरागढ़ जिले के रई धनौड़ा क्षेत्र का निवासी है।
पुलिस के अनुसार आरोपी को मुखबिर की सूचना पर पुनेड़ी महर रोड के पास से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान उसने अपराध स्वीकार कर लिया।
जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2022 में भी आरोपी को एक नाबालिग के अपहरण और यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया गया था। अदालत से सजा मिलने के बाद वह हरिद्वार जिला कारागार में बंद था और 14 मई 2026 को निजी बंधपत्र पर रिहा हुआ था।
पुलिस ने किन धाराओं में दर्ज किया मामला?
पिथौरागढ़ दुष्कर्म मामला में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के साथ-साथ पोक्सो (POCSO) एक्ट की संबंधित धाराएं भी जोड़ी हैं।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपी पर ऐसी धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है, जिनमें दोष सिद्ध होने पर आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक का प्रावधान है। विवेचना के दौरान सभी आवश्यक कानूनी प्रावधानों को शामिल किया गया है ताकि अदालत में मजबूत अभियोजन प्रस्तुत किया जा सके।
सीसीटीवी और पुलिस टीम की सतर्कता से बची बच्ची
इस पूरे मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई अहम साबित हुई। सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपी की पहचान की गई और बच्ची को समय रहते सुरक्षित बरामद कर लिया गया।
बच्ची की बरामदगी में हेड कांस्टेबल मुकेश शर्मा और कांस्टेबल पंकज गिरी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं आरोपी की गिरफ्तारी और पूरे अभियान का नेतृत्व उपनिरीक्षक कमलेश चंद्र जोशी ने किया।
पुलिस टीम को मिला पुरस्कार
पिथौरागढ़ दुष्कर्म मामला का सफल खुलासा करने वाली पुलिस टीम की सराहना करते हुए पुलिस अधीक्षक पिथौरागढ़ ने पूरी टीम को 5,000 रुपये के नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और अभियोजन पक्ष अदालत में प्रभावी पैरवी करेगा ताकि आरोपी को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।
यह मामला एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा, अपराधियों की निगरानी और गंभीर अपराधों में त्वरित न्याय की आवश्यकता को रेखांकित करता है। पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को दें।

