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मुरैना ट्रेन हादसा: मोबाइल ब्लास्ट की अफवाह ने ली 4 जानें, 500 मीटर तक बिखरे शवों के टुकड़े

मुरैना ट्रेन हादसा में मोबाइल ब्लास्ट और आग लगने की अफवाह के कारण 4 यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई। खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस से उतरने के बाद यात्री पातालकोट एक्सप्रेस की चपेट में आ गए। मामले की जांच के लिए 6 सदस्यीय समिति गठित की गई है।

मुरैना ट्रेन हादसा ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के पास हुए इस दर्दनाक रेल हादसे में चार लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य यात्री सदमे में हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में मोबाइल फटने और आग लगने की अफवाह फैलने के बाद यात्रियों में भगदड़ मच गई। घबराहट में कई यात्री ट्रेन से नीचे उतर गए और इसी दौरान दूसरी पटरी पर आ रही पातालकोट एक्सप्रेस की चपेट में आ गए।

हादसा इतना भयावह था कि मृतकों के शरीर के अंग करीब 500 मीटर तक रेलवे ट्रैक पर बिखर गए। शवों के अवशेषों को पोस्टमॉर्टम के लिए पोटलियों में समेटना पड़ा। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसने पूरे मामले की गंभीरता को उजागर कर दिया है।

मुरैना ट्रेन हादसा कैसे हुआ?

मुरैना ट्रेन हादसा रविवार शाम करीब 4:15 बजे उस समय हुआ जब ट्रेन नंबर 19665 खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस हेतमपुर और धौलपुर स्टेशन के बीच चल रही थी। बताया जा रहा है कि किसी यात्री ने मोबाइल फटने और ट्रेन में आग लगने की अफवाह फैला दी।

अफवाह फैलते ही यात्रियों में हड़कंप मच गया। किसी ने चेन पुलिंग कर ट्रेन रोक दी। ट्रेन रुकते ही कई यात्री अपनी जान बचाने के लिए नीचे उतर गए और रेलवे ट्रैक पर खड़े हो गए।

उन्हें अंदाजा नहीं था कि दूसरी पटरी पर तेज रफ्तार से पातालकोट एक्सप्रेस आ रही है।

दूसरी ट्रेन की चपेट में आए यात्री

जब यात्री ट्रैक पर खड़े थे, उसी दौरान दूसरी लाइन पर पातालकोट एक्सप्रेस तेजी से पहुंच गई। ट्रेन के लोको पायलट ने लगातार हॉर्न बजाया और यात्रियों को चेतावनी देने की कोशिश की, लेकिन अचानक हुई अफरा-तफरी के कारण लोग समय रहते हट नहीं सके।

लोको पायलट ने इमरजेंसी ब्रेक भी लगाए, लेकिन ट्रेन की गति अधिक होने के कारण हादसा टाला नहीं जा सका। कुछ ही सेकंड में चार लोग ट्रेन की चपेट में आ गए।

मुरैना ट्रेन हादसा में 4 लोगों की दर्दनाक मौत

इस भीषण हादसे में चार यात्रियों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान राजस्थान के बीकानेर निवासी बिरमा देवी (60), उत्तर प्रदेश के आगरा की रहने वाली शकुंतला सिंह (60), आगरा निवासी आफरीन (35) और उनके चार वर्षीय बेटे असद के रूप में हुई है।

हादसे के बाद घटनास्थल का दृश्य बेहद दर्दनाक था। रेलवे ट्रैक पर शवों के अवशेष दूर-दूर तक फैले हुए थे। राहत और बचाव दल को मृतकों के शरीर के हिस्सों को इकट्ठा करने में काफी समय लगा।

500 मीटर तक बिखरे मिले शवों के अवशेष

मुरैना ट्रेन हादसा की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मृतकों के शरीर के हिस्से करीब 500 मीटर तक फैले हुए थे। रेलवे और पुलिस अधिकारियों को पोस्टमॉर्टम के लिए अवशेषों को अलग-अलग पोटलियों में एकत्र करना पड़ा।

घटना के बाद स्थानीय प्रशासन, रेलवे सुरक्षा बल और पुलिस टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया।

हादसे का वीडियो आया सामने

हादसे का 39 सेकेंड का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में करीब 100 से ज्यादा यात्री रेलवे ट्रैक पर खड़े दिखाई देते हैं। कई लोगों के सिर पर सामान और हाथों में बैग भी नजर आते हैं।

वीडियो में देखा जा सकता है कि दूसरी पटरी पर पातालकोट एक्सप्रेस तेजी से आती है। लोको पायलट लगातार हॉर्न बजाता है, लेकिन घबराए यात्री समय रहते ट्रैक से नहीं हट पाते। इसके बाद ट्रेन कुछ लोगों को टक्कर मारते हुए आगे निकल जाती है।

यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों को अफवाहों से बचने की सीख भी दे रहा है।

मुरैना ट्रेन हादसा की जांच के लिए बनी 6 सदस्यीय समिति

रेलवे प्रशासन ने मुरैना ट्रेन हादसा की जांच के लिए छह सदस्यीय समिति का गठन किया है। झांसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह के अनुसार समिति घटनास्थल का निरीक्षण करेगी और रेलवे अधिकारियों, कर्मचारियों तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज करेगी।

जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही रेलवे प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की है।

अफवाहों से बचने की जरूरत

इस हादसे ने एक बार फिर साबित किया है कि अफवाहें कितनी घातक साबित हो सकती हैं। बिना पुष्टि के फैली एक सूचना ने चार परिवारों की खुशियां छीन लीं। विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे यात्रियों को सुरक्षा संबंधी जागरूकता बढ़ाने और आपातकालीन परिस्थितियों में सही व्यवहार की जानकारी देने की जरूरत है।

मुरैना ट्रेन हादसा केवल एक रेल दुर्घटना नहीं बल्कि अफवाहों के खतरनाक परिणाम का उदाहरण भी है। मोबाइल ब्लास्ट और आग लगने की अपुष्ट सूचना के कारण मची अफरा-तफरी ने चार लोगों की जान ले ली। अब सभी की नजर रेलवे जांच समिति की रिपोर्ट पर है, जिससे इस दर्दनाक हादसे की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।

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