क्या 10 दिन में सिद्धू पर होगा एक्शन? पार्टी नेताओं ने हाईकमान से की ये डिमांड
क्या 10 दिन में सिद्धू पर होगा एक्शन?
पार्टी नेताओं ने हाईकमान से की ये डिमांड
वंदे भारत- आम चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी विवाद एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है. लुधियाना कांग्रेस सांसद रवनीत बिट्टू ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को निशाने पर लिया है.उन्होंने मंगलवार को पार्टी आलाकमान से सिद्धू के खिलाफ 10 दिन के अंदर कार्रवाई करने की मांग की. रवनीत बिट्टू ने कहा, अगर हम यह चाहते हैं कि पंजाब कांग्रेस देश के लिए एक आइकन बने तो या तो सिद्धू या हमें (पार्टी सदस्यों को) बाहर का रास्ता दिखाना होगा.
बता दें कि कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू अलग-अलग जगहों पर रैली आयोजित करने की वजह से पार्टी नेताओं के निशाने पर आ गए हैं. स्थानीय नेताओं का कहना है कि प्रदेश इकाई से बिना चर्चा किए सिद्धू रैलियां कर रहे हैं. पार्टी के अंदर ही सिद्धू के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की जा रही है. इस मामले में पंजाब में कांग्रेस के प्रभारी देवेंद्र यादव ने कहा है कि चाहे वो कार्यकर्ता हो या बड़ा नेता, अनुशासन तोड़ता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. वहीं, सिद्धू का कहना है कि वो पार्टी की नींव को मजबूत करने के लिए लोगों के बीच जा रहे हैं.

’10 दिन के अंदर फैसला ले कांग्रेस हाईकमान’
आजतक के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा, हम 2022 का चुनाव नहीं हारते. हाईकमान ने बहुत देरी से फैसला लिया. अभी भी वक्त है कि हाईकमान जल्द से जल्द फैसला करे. किसी घर में दो आदमी सुबह और शाम आपस में लड़ेंगे तो वो घर कभी तरक्की नहीं करेगा. अगर दोनों भाइयों को समय से अलग कर दिया जाए तो वे अपना-अपना काम करेंगे. ये काम हाईकमान का है. 10 दिन के अंदर कोई फैसला लेना चाहिए. पंजाब कांग्रेस बहुत मजबूत है.
‘या हमें बाहर का दरवाजा दिखाया जाए या फिर…’
बिट्टू बोले, राहुल गांधी ने एक बार कहा था कि मैं जानता हूं कि ये वो कांग्रेस है, जो टेरिज्म के दौरान बिल्कुल खत्म हो गई थी. दोबारा भट्टी में तपकर 1992 में फिर बनी. तीन बार कांग्रेस बन चुकी है. सिद्धू को पार्टी से बाहर करने के सवाल पर बिट्टू ने स्पष्ट शब्दों में कहा, कोई एक फैसला किया जाए. दरवाजा या हमें बाहर का दिखाया जाए या उन्हें (सिद्धू) दिखाएं. अगर आप चाहते हैं कि पंजाब कांग्रेस पूरे देश के लिए आइकन बने तो फैसला यहां लेना पड़ेगा.

‘लुधियाना से टिकट ना मिला तो चुनाव नहीं लड़ूंगा’
बिट्टू ने यह भी बताया कि वो लुधियाना से चुनाव लड़ना चाहते हैं. उन्होंने कहा, मैंने पहली बार आनंदपुर साहिब से चुनाव लड़ा था. हालांकि, मेरा गृह जिला लुधियाना है. पिछले दो चुनाव 2014 और 2019 में लुधियाना से चुनाव लड़ा है. मैंने हाईकमान से भी यह कहा है कि मुझे लुधियाना से टिकट दिया जाए. वरना कहीं से भी चुनाव नहीं लड़ूंगा.
‘कांग्रेस कार्यकर्ता नहीं चाहते अलायंस’
इंडिया अलायंस को लेकर बिट्टू ने कहा, दो चीजें प्रमुख हैं. एक- नीचे कार्यकर्ताओं की बात है और दूसरा- प्रधानमंत्री बनाने की बात है. मैं पार्टिलामेंट में भी बैठता हूं और फ्लोर लीडर भी हूं. बीजेपी-एनडीए के पास इतना बड़ा बहुमत है, उसको देखते हुए हमें विपक्ष को लेकर एक प्रोग्राम बनाना पड़ता है. जहां तक पंजाब की बात है तो चुनाव करीब आ गए हैं. कार्यकर्ता हमें रोज बोलते हैं कि बिल्कुल भी अलायंस नहीं होना चाहिए. अगर अलायंस होता है तो कांग्रेस को नुकसान होगा. सीधी और स्पष्ट बात है. 2022 के चुनाव में बहुत सारी ऐसी बातें बोलकर आम आदमी पार्टी ने सरकार बनाई है. उसके बाद पुलिस, विजिलेंस और सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग किया गया है.

‘अलायंस पर अंतिम फैसला हाईकमान लेगा’
बिट्टू का कहना था कि कांग्रेस नेताओं को निशाना बना लें, कोई बात नहीं है. लेकिन ग्राउंड लेवल पर गांव के सरपंच तक को पार्टी में शामिल होने के लिए धमकाया जा रहा है. पंजाब में 31 सदस्यों वाली पॉलिटिकल कमेटी बनाई थी. सभी ने कहा है कि हमें अकेला लड़ना चाहिए. बाकी हाईकमान का निर्णय मान्य होगा. यह मानना पड़ेगा कि यहां AAP, बीजेपी, कांग्रेस और अकाली दल का प्रभाव है. मोदी लहर के बावजूद कांग्रेस के सबसे ज्यादा सांसद चुने गए थे. दो साल की AAP सरकार में कुछ काम नहीं हुआ. पुराने काम अलग चीज हैं. वर्कर्स मजबूत हैं. इसलिए वो अलायंस के पक्ष में नहीं हैं.
‘राजनीति कोई व्यापार नहीं है’
कांग्रेस नेताओं के पार्टी छोड़े जाने के सवाल पर बिट्टू ने कहा, 2004 का बैच था. हम 2009 बैच वाले हैं. उन नेताओं को बहुत कुछ मिला है. इसका जवाब संदीप दीक्षित ने बहुत सही दिया है. राजनीति कोई व्यापार नहीं है. इस कंपनी में प्रॉफिट नहीं है तो दूसरे में चले जाएं. आजकल शॉर्टकल का रास्ता अपनाया जा रहा है. आज कांग्रेस को खड़ा करने की जरूरत है.
‘सिद्धू के खिलाफ कार्रवाई की संभावना नहीं’
पार्टी के करीबी सूत्रों का कहना है कि नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ विरोधी गुट के मोर्चा संभालने से औपचारिक चेतावनी मिल सकती है. हालांकि, किसी तरह की कार्रवाई संभव नहीं है. सूत्रों का कहना है कि पंजाब में पार्टी मामलों के प्रभारी देवेंद्र यादव की ओर से सिद्धू को मौखिक सलाह पहले ही दी जा चुकी है. सूत्रों का आगे कहना है कि सिद्धू का राजनीतिक कद काफी बड़ा है और पार्टी आलाकमान ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा, जिससे कैप्टन अमरिंदर सिंह और सुनील जाखड़ जैसे बड़े नेताओं की तरह एक और नेता को खोना पड़े.

पार्टी शायद सिद्धू को खोना भी पसंद नहीं करेगी. इसके अलावा जब लोकसभा चुनाव सिर पर हैं तो सिद्धू को पार्टी से निकालने जैसी निर्णायक कार्रवाई भी संभव नहीं है. दरअसल, पार्टी आलाकमान ने उन रूठे नेताओं, पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए कहा है. वहीं, सिद्धू अपने विरोधियों के खिलाफ लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं. सिद्धू ने पीसीसी प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वारिंग पर राज्य सरकार के साथ सांठगांठ करने का आरोप लगाया है. वहीं, वारिंग ने सिद्धू को उन लोगों के नाम बताने की चुनौती दी है, जिनकी AAP सरकार में 25 फीसदी हिस्सेदारी है. इसके साथ ही यह सलाह दी है कि वो कोई भी कार्यक्रम या रैली करने की इजाजत लें.
