AP Dhillon Firing Case: कनाडा से डिपोर्ट होगा लॉरेंस गैंग का शूटर अभिजीत किंगरा, IRB का बड़ा फैसला

AP Dhillon Firing Case एक बार फिर सुर्खियों में है। कनाडा में पंजाबी सिंगर एपी ढिल्लों के घर पर फायरिंग करने वाले लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कथित शूटर अभिजीत किंगरा को अब कनाडा से डिपोर्ट किया जाएगा। कनाडा के इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी बोर्ड (IRB) ने साफ कर दिया है कि किंगरा को देश में रहने का कोई अधिकार नहीं है और उसे भारत वापस भेजा जाना चाहिए।
यह फैसला 15 जून को सुनाया गया। हालांकि, अभिजीत किंगरा ने बोर्ड के सामने दावा किया कि यदि उसे भारत भेजा गया तो उसकी हत्या हो सकती है। लेकिन बोर्ड ने उसकी दलीलों को पर्याप्त सबूतों के अभाव में खारिज कर दिया।
AP Dhillon Firing Case में क्या हुआ था?
2 सितंबर 2024 को ब्रिटिश कोलंबिया के वैंकूवर आइलैंड स्थित एपी ढिल्लों के घर पर देर रात फायरिंग की गई थी। इस हमले में दो लोग शामिल थे, जिनमें से एक अभिजीत किंगरा बताया गया।
जांच के अनुसार, किंगरा ने घर पर करीब 14 गोलियां चलाईं, जबकि उसके साथी ने बाहर खड़ी गाड़ियों पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। इस घटना ने पूरे कनाडा और पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री में सनसनी फैला दी थी।
4000 डॉलर के लालच में बना शूटर
सुनवाई के दौरान अभिजीत किंगरा ने एक बड़ा खुलासा किया। उसने बताया कि उसकी कंपनी में काम करने वाले एक सहयोगी ने उसे ब्रिटिश कोलंबिया जाकर एपी ढिल्लों के घर पर फायरिंग करने के लिए 4,000 कनाडाई डॉलर की पेशकश की थी।
किंगरा ने स्वीकार किया कि पैसों के लालच में उसने यह काम किया। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग ढाई लाख रुपये के बराबर है।
स्टूडेंट वीजा पर गया, गैंगस्टर बन गया
अभिजीत किंगरा भारत से पढ़ाई के लिए कनाडा गया था। शुरुआती दिनों में वह विन्निपेग की एक मूविंग कंपनी में काम करता था। इसी दौरान उसका संपर्क लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े लोगों से हुआ।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, पहले उससे छोटे-मोटे अपराध करवाए गए और बाद में वह गैंग का सक्रिय सदस्य बन गया। उसके खिलाफ रंगदारी मांगने, धमकाने और फायरिंग करने जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं।
सोशल मीडिया वीडियो बना सबसे बड़ा सबूत
AP Dhillon Firing Case में सबसे अहम सबूत वह वीडियो बना, जिसे खुद किंगरा ने अपने मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किया था।
फायरिंग के कुछ घंटों बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े अकाउंट्स पर इसे पोस्ट किया गया, जिसमें किंगरा स्पष्ट रूप से फायरिंग करता दिखाई दे रहा था।
यही वीडियो बाद में कनाडाई पुलिस के लिए सबसे मजबूत सबूत साबित हुआ।
कोर्ट में बचाव की कोशिश नाकाम
सुनवाई के दौरान किंगरा ने खुद को एक सीधा-सादा युवक बताया। उसने दावा किया कि उसे नहीं पता था कि वह लॉरेंस बिश्नोई गैंग के लिए काम कर रहा है।
उसने कहा कि माता-पिता की आर्थिक मदद करने और जल्दी पैसा कमाने की चाह में वह अपराध की दुनिया में फंस गया। साथ ही उसने यह भी कहा कि भारत लौटने पर उसकी जान को खतरा है।
लेकिन IRB सदस्य अजीम लालजी ने कहा कि किंगरा अपनी बात साबित करने के लिए कोई ठोस दस्तावेज या प्रमाण पेश नहीं कर सका। बोर्ड ने यह भी माना कि वह कई सवालों के जवाब में जानबूझकर “मुझे याद नहीं” कहकर सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रहा था।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग का कनाडा कनेक्शन
कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) ने सुनवाई के दौरान बताया कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग कनाडा में भारतीय मूल के लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।
एजेंसी के मुताबिक, गैंग एक “इंसुलेशन सिस्टम” के तहत काम करता है, जिसमें निचले स्तर के शूटर केवल अपने संपर्क व्यक्ति को जानते हैं। उन्हें गैंग के शीर्ष नेताओं या फंडिंग स्रोतों की जानकारी नहीं होती।
नए युवाओं को ऐसे बनाया जाता है गैंग का हिस्सा
सीबीएसए ने बताया कि कनाडा में स्टूडेंट वीजा पर आने वाले युवाओं को निशाना बनाया जाता है। आर्थिक तंगी या जल्दी पैसा कमाने की चाह रखने वाले युवाओं को छोटे-छोटे काम देकर धीरे-धीरे गैंग में शामिल कर लिया जाता है।
गोल्डी बराड़ और उसके नेटवर्क के जरिए कई युवाओं को कथित रूप से गैंग से जोड़ा गया।
कनाडा सरकार का बड़ा एक्शन
AP Dhillon Firing Case के बाद कनाडाई एजेंसियों ने गैंगवार और जबरन वसूली के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है।
CBSA की रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में 400 से अधिक मामलों की जांच चल रही है। वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में अब तक 55 से ज्यादा संदिग्धों को कनाडा से बाहर निकाला जा चुका है।
AP Dhillon Firing Case केवल एक फायरिंग की घटना नहीं है, बल्कि यह कनाडा में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय गैंग नेटवर्क की गंभीरता को भी उजागर करता है। अभिजीत किंगरा का डिपोर्टेशन इस दिशा में कनाडा सरकार की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि वह फेडरल कोर्ट में अपील करता है या उसे भारत वापस भेज दिया जाता है।
