2001 से 2025 तक—वाजपेयी, पुतिन और मोदी के नेतृत्व का बदलता वैश्विक परिदृश्य
2001 का वर्ष वैश्विक राजनीति में बड़े बदलावों का दौर था। भारत में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी देश को तेज़ी से बदलते भू-राजनीतिक माहौल के अनुरूप दिशा दे रहे थे। कारगिल युद्ध के बाद भारत-पाक संबंधों में तनाव के बावजूद वाजपेयी ने संवाद की पहल और आर्थिक सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया। उसी समय रूस में व्लादिमीर पुतिन अपनी पहली राष्ट्रपति अवधि की शुरुआत कर चुके थे और सोवियत-पश्चात रूस को स्थिर करने की दिशा में कदम उठा रहे थे।2025 में परिदृश्य काफी बदल चुका है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं—चाहे वह प्रौद्योगिकी, रक्षा सहयोग हो या इंडो-पैसिफिक रणनीति। रूस में पुतिन अभी भी प्रमुख राजनीतिक शक्ति बने हुए हैं और पश्चिमी देशों के साथ तनाव के बीच नई भू-रणनीतियाँ आकार ले रही हैं।2001 से 2025 के बीच इन तीन नेताओं की नीतियों में अंतर स्पष्ट है—वाजपेयी का सहमति-आधारित नेतृत्व, पुतिन की केंद्रीकृत सत्ता और मोदी का आक्रामक वैश्विक कूटनीति मॉडल। इन सबने अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित किया है।

