पठानकोट लधपालवां टोल हंगामा: बूम बैरियर तोड़कर निकले कई टिपर, माइनिंग टीम से बहस
पठानकोट लधपालवां टोल हंगामा उस समय देखने को मिला जब लधपालवां टोल बैरियर पर रेत-बजरी से लदे टिपरों के दस्तावेजों की जांच के दौरान माइनिंग विभाग की टीम और कुछ वाहन चालकों के बीच कथित तौर पर बहस हो गई। मामला इतना बढ़ गया कि कुछ टिपर चालक कथित तौर पर टोल का बूम बैरियर तोड़कर अपने वाहन लेकर वहां से निकल गए। घटना के बाद मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के पहुंचने से स्थिति को नियंत्रित किया गया।
पठानकोट जिले में रेत-बजरी की ढुलाई और माइनिंग से जुड़े नियमों को लेकर पहले से ही विवाद की स्थिति बनी हुई है। इसी बीच लधपालवां टोल पर हुई इस घटना ने एक बार फिर माइनिंग व्यवस्था, वाहनों की जांच और ट्रांसपोर्टरों के आरोपों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लधपालवां टोल पर माइनिंग विभाग कर रहा था दस्तावेजों की जांच
प्राप्त जानकारी के अनुसार, माइनिंग विभाग की टीम लधपालवां टोल बैरियर के पास रेत-बजरी से लदे टिपरों की जांच कर रही थी। टीम द्वारा वाहनों के बिल, माइनिंग से संबंधित दस्तावेज और अन्य कागजात चेक किए जा रहे थे।
इसी दौरान कुछ वाहन चालकों के साथ विभागीय टीम की कथित तौर पर बहस हो गई। देखते ही देखते मौके पर माहौल तनावपूर्ण हो गया। आरोप है कि कुछ टिपर चालकों ने टोल के बूम बैरियर को तोड़ दिया और वाहन लेकर वहां से निकल गए।
मौके पर मौजूद पुलिस कर्मचारियों ने वाहनों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन कुछ टिपर वहां से निकलने में सफल रहे। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला।
पठानकोट लधपालवां टोल हंगामा में ट्रांसपोर्टरों ने उठाए सवाल
घटना के बाद ट्रांसपोर्टरों की ओर से माइनिंग विभाग की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए। ट्रांसपोर्टर संजय, नीरज और अनुज ने विभाग की कार्रवाई पर कथित तौर पर पक्षपात और वसूली के आरोप लगाए।
ट्रांसपोर्टरों का दावा है कि बड़ी फर्मों से जुड़े वाहनों को कथित तौर पर बिना ज्यादा रोक-टोक के गुजरने दिया जाता है, जबकि छोटे ट्रांसपोर्टरों के वाहनों की सख्ती से जांच की जाती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि यदि सभी वाहनों की जांच नियमों के अनुसार की जा रही है तो कार्रवाई में एक समान व्यवस्था होनी चाहिए। उनका आरोप है कि छोटे वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्टरों को जांच के दौरान ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
किसान नेता ने माइनिंग व्यवस्था पर उठाया सवाल
भारतीय किसान यूनियन के यूथ पंजाब प्रधान इंदरपाल सिंह बैंस ने भी मामले को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी नियमों के तहत माइनिंग पोर्टल बंद है तो बिना बिल के रेत-बजरी की ढुलाई कैसे हो रही है।
उन्होंने मांग की कि यदि किसी वाहन में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो केवल वाहन चालक के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय संबंधित क्रशर मालिकों और सप्लाई से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
इंदरपाल सिंह बैंस का कहना है कि रेत-बजरी की सप्लाई चेन में वाहन चालक अकेला जिम्मेदार नहीं हो सकता। इसलिए जांच को पूरी व्यवस्था तक पहुंचाया जाना चाहिए और जहां भी नियमों का उल्लंघन मिले, वहां नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
माइनिंग विभाग ने जांच को बताया नियमों के अनुसार
वहीं, माइनिंग जेई अमित ने विभाग की ओर से अपना पक्ष रखते हुए कहा कि टीम द्वारा वाहनों के बिल और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही थी। उनका कहना है कि जिन वाहनों के पास वैध दस्तावेज मौजूद थे, उन्हें जांच पूरी होने के बाद जाने दिया गया।
विभाग के अनुसार, वाहनों की जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रेत-बजरी की ढुलाई आवश्यक दस्तावेजों के साथ की जा रही है या नहीं। ऐसे में दस्तावेजों की जांच को विभागीय प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है।
पुलिस ने संभाला मामला, जांच के बाद कार्रवाई का भरोसा
मामले की सूचना मिलने के बाद डीएसपी देहात सुखजिंदर सिंह भी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी ली।
डीएसपी देहात ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की ओर से कानून का उल्लंघन किया गया है तो जांच के बाद नियमों के अनुसार उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की ओर से घटना के दौरान हुए विवाद और बूम बैरियर तोड़कर निकलने वाले वाहनों से संबंधित पहलुओं की जांच की जा सकती है।
पठानकोट लधपालवां टोल हंगामा के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि टोल बैरियर तोड़कर निकलने वाले वाहनों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और माइनिंग विभाग की जांच व्यवस्था को लेकर ट्रांसपोर्टरों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच किस स्तर तक पहुंचती है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

