सतलुज फिल्म पर बैन: शिरोमणि कमेटी ने किया विशाल रोष मार्च का ऐलान, प्रतिबंध हटाने की उठाई मांग
सतलुज फिल्म पर बैन को लेकर पंजाब में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने फिल्म पर लगाए गए प्रतिबंध का विरोध करते हुए अमृतसर में विशाल रोष मार्च निकालने का ऐलान किया है। कमेटी का कहना है कि यह फिल्म 1984 के दौर और उसके बाद के घटनाक्रम पर आधारित है तथा इसे प्रतिबंधित करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और ऐतिहासिक तथ्यों को सामने लाने की कोशिशों पर रोक लगाने जैसा है।
शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी के निर्देश पर यह फैसला लिया गया है। कमेटी ने घोषणा की है कि रोष मार्च शिरोमणि कमेटी कार्यालय से शुरू होकर उपायुक्त (डीसी) कार्यालय तक जाएगा, जहां प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर फिल्म से प्रतिबंध हटाने की मांग की जाएगी।
सतलुज फिल्म पर बैन के खिलाफ अमृतसर में रोष मार्च
सतलुज फिल्म पर बैन के विरोध में शिरोमणि कमेटी ने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण होगा और इसका उद्देश्य सरकार तक सिख समुदाय की भावनाएं पहुंचाना है।
घोषणा के अनुसार, सुबह 9:30 बजे शिरोमणि कमेटी कार्यालय से विशाल रोष मार्च निकलेगा और डीसी कार्यालय पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसमें बड़ी संख्या में सिख संगत और विभिन्न धार्मिक संगठनों के शामिल होने की संभावना जताई गई है।
फिल्म को बताया 1984 के दौर की घटनाओं पर आधारित
शिरोमणि कमेटी के सचिव बलविंदर सिंह काहलवां ने कहा कि फिल्म में 1984 के दौर और उसके बाद के समय में निर्दोष सिखों, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के साथ हुई घटनाओं को दर्शाने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा कि फिल्म में मानवाधिकार कार्यकर्ता शहीद भाई जसवंत सिंह खालड़ा द्वारा कथित रूप से लापता लोगों और अज्ञात शवों से जुड़े मामलों को उजागर करने के प्रयासों को भी दिखाया गया है।
कमेटी का कहना है कि फिल्म ऐतिहासिक घटनाओं को दर्शाने का प्रयास करती है और इसे देखने का अधिकार दर्शकों को मिलना चाहिए।
सतलुज फिल्म पर बैन को लेकर सरकार से मांग
सतलुज फिल्म पर बैन हटाने की मांग करते हुए शिरोमणि कमेटी ने कहा कि सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
कमेटी का कहना है कि यदि किसी फिल्म को लेकर किसी पक्ष को आपत्ति है, तो उसका समाधान कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। उनका मानना है कि किसी फिल्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय उचित समीक्षा की जानी चाहिए।
दिलजीत दोसांझ की पहल की सराहना
प्रदर्शन की घोषणा के दौरान सिख नेताओं ने अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की भी सराहना की। उनका कहना था कि उन्होंने एक संवेदनशील और ऐतिहासिक विषय को फिल्म के माध्यम से सामने लाने का प्रयास किया है।
नेताओं का कहना है कि इतिहास से जुड़े विषयों पर चर्चा और प्रस्तुति लोकतांत्रिक समाज का हिस्सा है तथा ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
प्रतिबंध नहीं हटने पर दी आंदोलन की चेतावनी
सतलुज फिल्म पर बैन के विरोध में शिरोमणि कमेटी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने प्रतिबंध नहीं हटाया, तो सिख संगत अपने स्तर पर फिल्म के प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक कार्यक्रम आयोजित करने पर विचार करेगी।
कमेटी ने लोगों से अपील की कि वे शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखें तथा किसी भी प्रकार की अफवाह से बचें।
14 जुलाई के कार्यक्रम में पहुंचने की अपील
शिरोमणि कमेटी ने 14 जुलाई को हरिके पत्तन में आयोजित होने वाले अरदास समागम में भी अधिक से अधिक संगत को शामिल होने की अपील की है।
इसके अलावा 15 से 17 जुलाई तक अमर शहीद जत्थेदार तेजा सिंह समुंदरी की 100वीं शताब्दी श्रद्धापूर्वक मनाने की भी घोषणा की गई है। कमेटी ने कहा कि इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
पंजाब में बढ़ी राजनीतिक और सामाजिक चर्चा
सतलुज फिल्म पर बैन को लेकर पंजाब में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। विभिन्न संगठनों और नेताओं की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
जहां एक पक्ष प्रतिबंध हटाने की मांग कर रहा है, वहीं दूसरे पक्ष की ओर से फिल्म के विभिन्न पहलुओं पर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और संबंधित पक्षों की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।

